संभल हिंसा: सुप्रीम कोर्ट से NSA रद होते ही देर रात जेल से बाहर आया मुल्ला अफरोज, पुलिस की कड़ी निगरानी
सुप्रीम कोर्ट द्वारा एनएसए रद्द किए जाने के बाद संभल हिंसा का आरोपी मुल्ला अफरोज जेल से रिहा हो गया ...और पढ़ें

संभल में अपने घर पर स्वजन के साथ लाल घेरे में मुल्ला अफरोज। स्रोत. इंटरनेट मीडिया
HighLights
मास्टरमाइंड शारिक साठा के इशारे पर हिंसा करने का आरोप, एनएसए रद होने के बाद पहुंचा अपने घर
जागरण संवाददाता, संभल। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा एनएसए रद होने के बाद मंगलवार की रात को ही जामा मस्जिद हिंसा का आरोपित मुल्ला अफरोज जेल से रिहा हो गया है। अब वह थाना रायसत्ती में हौज भदेसराय में बल्ले की पुलिया के नजदीक अपने घर पर आ गया है। उसके आने के बाद पुलिस भी उसकी गतिविधियों पर नजर लगाए हुए हैं।
पुलिस अधीक्षक विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि मुल्ला अफरोज हिस्ट्रीशीटर है और पुलिस हिस्ट्रीशीटराें की निगरानी करती है। इस नाते उस पर नजर रहेगी। बता दें कि 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद में सर्वे के विरोध में संभल में हिंसा भड़क गई थी।
इसमें चार लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि 30 से अधिक पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी घायल हुए थे। मामले में 37 लोगों को नामजद करते हुए करीब 3,750 अज्ञात लोगों के खिलाफ सात मुकदमे दर्ज किए गए थे।
इस प्रकरण में पुलिस ने आरोपित मुल्ला अफरोज को 17 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। 19 जनवरी जेल भेज दिया है। इसके साथ हिंसा के नौ आरोपित भी गिरफ्तार किए गए थे।
पुलिस के मुताबिक, उसके कब्जे से 32 बोर की पिस्टल, तीन कारतूस और 15 खोखे बरामद हुए थे। अफरोज के खिलाफ दर्ज छह मुकदमों में चार लोगों की हत्या से, जबकि दो बवाल और हिंसा से संबंधित हैं।
पूछताछ में पुलिस ने अफरोज पर हिंसा के दौरान गोलीबारी करने और चार युवकों को गोली मारने की बात स्वीकार करने का दावा किया था। मुल्ला अफरोज ने बताया था कि वह प्रापर्टी डीलिंग का काम करता था। बाद में वह शारिक साठा के नेटवर्क से जुड़ गया।
वर्ष 2012 से दुबई में रह रहे साठा से वह मोबाइल एप के माध्यम से संपर्क में था। पुलिस पूछताछ में अफरोज ने हिंसा के पीछे साठा की साजिश से जुड़ी जानकारी दिए जाने का दावा किया था।
जांच में साठा के नेटवर्क से हिंसा के दौरान विदेशी हथियार उपलब्ध कराए जाने की बात भी सामने आई थी। पुलिस ने अफरोज के खिलाफ 13 अक्टूबर 2025 को एनएसए के तहत कार्रवाई की थी।
इसके बाद अफरोज की ओर से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर एनएसए की कार्रवाई को चुनौती दी गई। उसने खुद को गलत तरीके से फंसाए जाने का आरोप लगाया था।
आठ जून 2026 को न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद एनएसए के तहत निरुद्ध अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए मुल्ला अफरोज की एनएसए के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपित का कबूलनामा अकेले हिरासत का आधार नहीं हो सकता। इसके साथ ही गैरकानूनी हिरासत आदेश के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
