संभल में फिर सुलगने लगी पुरानी सियासी अदावत: अखिलेश यादव की एक सीट और आमने-सामने दो दिग्गज खानदान
संभल में समाजवादी पार्टी के टिकट को लेकर दो प्रमुख राजनीतिक परिवारों, इकबाल महमूद और जियाउर्रहमान बर्क के बीच पुरानी ...और पढ़ें

इकबाल महमूद, विधायक और जियाउर्रहमान बर्क, सांसद
HighLights
कभी अखिलेश ने मिटाई थीं दूरियां, अब फिर आमने-सामने आने के आसार
सौरव प्रजापति, संभल। संभल की सियासत में पुरानी अदावत फिर सुलगने लगी है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी की संभल सीट पर टिकट को लेकर दो सियासी खानदानों के बीच टकराव के आसार बढ़ गए हैं। एक तरफ सात बार के विधायक इकबाल महमूद अपने बेटे सुहैल इकबाल को चुनाव लड़ाने का ऐलान कर चुके हैं।
वहीं दूसरी तरफ सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने अपने वालिद ममलूकर्रहमान बर्क की दावेदारी का खुलकर समर्थन कर दिया है। ऐसे में संभल की सियासत में सवाल उठने लगा है कि सपा की एक सीट पर किस खानदान की दावेदारी भारी पड़ेगी।
दोनों परिवारों के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई पुरानी है। 2024 में पूर्व सांसद डा. शफीकुर्रहमान बर्क के निधन पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उनके आवास पर शोक जताने पहुंचे थे। उस समय विधायक इकबाल महमूद भी उनके साथ गए थे।
इसे दोनों परिवारों के बीच दूरियां कम होने के संकेत के रूप में देखा गया था। हालांकि, 24 नवंबर 2024 को संभल में हुई हिंसा के बाद दोनों परिवारों के बीच फिर दूरी बढ़ने की चर्चाएं तेज हो गईं।
हिंसा के मामले में सांसद जियाउर्रहमान बर्क और विधायक के बेटे सुहैल इकबाल दोनों के नाम सामने आए थे। बाद में पुलिस ने सुहैल का नाम मामले से निकाल दिया, जबकि सांसद बर्क के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।
इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय सियासत में दोनों परिवारों के रिश्तों को लेकर चर्चाएं तेज हुईं। दोनों परिवारों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक अहम प्रसंग वर्ष 2022 का संभल नगर पालिका चुनाव भी है।
उस समय पूर्व सांसद डाॅ. बर्क ने एक निर्दलीय प्रत्याशी को मैदान में उतारा था। चुनाव में विधायक इकबाल महमूद की पत्नी रूकसाना इकबाल को हार का सामना करना पड़ा था।
इस घटनाक्रम को भी दोनों परिवारों के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई से जोड़कर देखा गया था। अब इकबाल महमूद अपने बेटे सुहैल को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं, जबकि सांसद बर्क अपने वालिद की दावेदारी के समर्थन में उतर आए हैं।
ऐसे में सपा नेतृत्व के सामने दोनों परिवारों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। टिकट किसी एक को ही मिलना है, लेकिन फैसला दूसरे खेमे की राजनीतिक भूमिका को भी प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल प्रत्याशी को लेकर पार्टी का अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। अब निगाहें अखिलेश यादव पर टिकी हैं कि वह किस परिवार पर भरोसा जताते हैं और संभल में टिकट की यह रार पार्टी के सियासी समीकरणों को किस दिशा में ले जाती है।
सांसद कर रहे पिता के टिकट की पैरवी, साथ निभाने का किया था वादा : इकबाल
सदर विधायक इकबाल महमूद ने सांसद जियाउर्रहमान बर्क क बयान आने के बाद कहा कि सांसद अपने वालिद को टिकट दिलवाने की पैरवी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर कर रहे हैं। बोले, टिकट मांगना हर किसी का अधिकार है।
पुरानी अदावत रंग लाने के सवाल पर बोले, अदावत क्यों छिड़ेगी। सांसद ने अपने पिता के साथ हमारे यहां पर पहुंचकर जनता के साथ साथ निभाने का वादा किया था। अब टिकट किसी का भी हो, चुनाव में साथ निभाना चाहिए।
