संभल में सियासी संग्राम: सपा विधायक और मुशीर चौधरी में जुबानी जंग, 2027 के चुनाव से पहले तेज हुआ विवाद
संभल में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा विधायक इकबाल महमूद और नगर पालिका चेयरमैन पति मुशीर चौधरी के बीच ...और पढ़ें

सदर विधायक इकबाल महमूद और मुशीर चौधरी, पालिका चेयरमैन पति
HighLights
2027 की चुनावी जंग से पहले आरोप-प्रत्यारोप तेज, दोनों ने एक-दूसरे पर साधा निशाना
जागरण संवाददाता, संभल। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संभल की सियासत में घमासान मचने लगा है। सदर विधायक इकबाल महमूद और नगर पालिका चेयरमैन पति मुशीर चौधरी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। विधायक ने एआइएमआइएम को भाजपा की ''बी पार्टी'' बताते हुए मुशीर चौधरी पर निशाना साधा तो जवाब में उन्होंने भी विधायक पर पलटवार करते हुए कई आरोप लगाए। दोनों के बयानों से साफ है कि संभल की सियासी जमीन पर आने वाले चुनाव को लेकर खींचतान अभी से तेज हो गई है।
सदर विधायक इकबाल महमूद ने 24 नवंबर 2024 की हिंसा का जिक्र करते हुए मुशीर चौधरी पर तंज कसा। कहा कि जब हिंसा में पांच लोगों की मौत हुई थी, तब वह कहां थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुशीर चौधरी ने किसी के घर जाकर हाल तक नहीं देखा।
विधायक ने एआइएमआइएम को भाजपा की ''बी पार्टी'' बताते हुए कहा कि वह अपना रुतबा किसे दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि संभल समाजवादी पार्टी का गढ़ है और यहां सपा ही फतह करेगी।
उधर, विधायक के बयान पर चेयरमैन पति मुशीर चौधरी ने कहा कि अब जनता पहचान चुकी है। सदर विधायक को एआइएमआइएम से डर लगता है, इसलिए वह हर कार्यक्रम में एएआइएमआइएम और नगर पालिका चेयरमैन पति की चर्चा करते हैं।
उन्होंने दावा किया कि हिंसा के दौरान जिन लोगों की मृत्यु हुई, वह उनके घर सबसे पहले पहुंचे थे। विधायक पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने पुत्र का नाम हिंसा से जुड़े मुकदमों से बाहर करा लिया।
उन्होंने चेयरमैनी के चुनाव का आंकड़ा रखते हुए कहा कि विधायक की पत्नी सात हजार वोटों तक सीमित रह गई थीं, जबकि एआइएमआइएम प्रत्याशी को 44 हजार वोट मिले। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि वोटर किस ओर है।
दोनों नेताओं की बयानबाजी ने संभल में 2027 की चुनावी जंग की तस्वीर अभी से दिलचस्प बना दी है। विधायक जहां सपा के गढ़ में अपनी पकड़ का दावा कर रहे हैं।
वहीं नगर पालिका चेयरमैन पति ने 44 हजार वोटों का आंकड़ा सामने रखकर एआइएमआइएम के प्रभाव का संदेश दे रहे हैं। अब देखना यह है कि यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में किस तरह सियासी मुकाबले में बदलती है।
