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बाढ़ के मुहाने पर संभल के 14 गांव: गंगा का पानी बढ़ा तो थमी जिंदगी, सिर्फ नाव बनी आखिरी सहारा

Published: Wed, 05 Aug 2026 02:54 PM (IST)

रजपुरा ब्लॉक के 14 गंगा किनारे बसे गांवों में जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का डर और फसलों व चारे का ...और पढ़ें

हरिबाबा बांध पर लगे बांस बल्ली के घेरे में नहाते लोग। जागरण

हरिबाबा बांध पर लगे बांस बल्ली के घेरे में नहाते लोग। जागरण

HighLights

  1. गंगा का जलस्तर बढ़ते ही रजपुरा ब्लाक के गंगा किनारे बसे गांवों में डर का माहौल

संवाद सूत्र, रजपुरा (संभल)। बरसात के मौसम में गंगा का जलस्तर बढ़ते ही रजपुरा ब्लाक के गंगा किनारे बसे 14 गांव उमेदपुर, पीताम्बरपुर, हरदासपुर, मोलनपुर डांडा, दीपपुर डांडा, भोपतपुर, सिसौना डांडा, चाऊपुर डांडा, सिकन्दरपुर खागी, बसन्तपुर डांडा, जिजोड़ा डांडा, भीकमपुर जागीर, जमालपुर डांडा, रामपुर खादर के ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ने लगी हैं।

हर साल बाढ़ और बढ़ते जलस्तर का सबसे अधिक असर किसानों और पशुपालकों पर पड़ता है। गंगा के किनारे स्थित खेतों में पानी भर जाने से कई किसानों की फसलें जलमग्न होकर खराब हो जाती हैं। वहीं पशुओं के लिए हरे चारे का संकट भी गहरा जाता है।

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ऐसे में ग्रामीणों को रोज सुबह और शाम नाव के सहारे गंगा के बेले में जाकर हरा चारा काटकर लाना पड़ता है। किसान बताते हैं कि जिन खेतों में मक्का, बाजरा, ज्वार, गन्ना और अन्य खरीफ की फसलें बोई गई थीं, उनमें से कई खेतों में पानी भरने लगा है।

यदि जलस्तर लगातार बढ़ता रहा तो फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ता है और पशुओं के चारे का संकट अलग से खड़ा हो जाता है। नाव के जरिये जिंदगी का पहिया चलता है।

मोलनपुर डांडा निवासी नेत्रपाल ने बताया कि गंगा का पानी बढ़ते ही गांव से बेले तक जाने वाले सभी रास्ते बंद हो जाते हैं। ऐसे में रोज सुबह और शाम चप्पू वाली नाव से गंगा पार जाकर पशुओं के लिए हरा चारा लाना पड़ता है।

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कई बार तेज बहाव के कारण नाव चलाना भी मुश्किल हो जाता है, लेकिन पशुओं के लिए चारा लाना हमारी मजबूरी है। कुमारपाल ने बताया कि हर साल यही स्थिति बनती है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से कई किसानों की फसलें पानी में डूबकर खराब हो जाती हैं।

इसके बाद पशुओं के लिए चारे की समस्या और बढ़ जाती है। चारा लाने के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ती है। यदि प्रशासन की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था या सहायता मिले तो ग्रामीणों को राहत मिल सकती है।

नरौरा बैराज में गंगा का जलस्तर घटा, राहत की स्थिति

गंगा में जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे तटीय क्षेत्रों के लोगों ने राहत की सांस ली है। सिंचाई विभाग के अनुसार, मंगलवार सुबह छह बजे नरौरा स्थित चौधरी चरण सिंह गंगा बैराज पर डाउन स्ट्रीम जलस्तर 178.11 मीटर दर्ज किया गया, जबकि सोमवार दोपहर 12 बजे यह 178.29 मीटर था। इस प्रकार 24 घंटे में जलस्तर 0.18 मीटर कम हुआ।

इसी अवधि में पानी का डिस्चार्ज भी 1,47,845 क्यूसेक से घटकर 1,24,173 क्यूसेक रह गया। मंगलवार को वर्षा शून्य मिलीमीटर दर्ज की गई। सिंचाई विभाग के एसडीओ अंकित सिंह ने बताया कि गंगा का जलस्तर लगातार घट रहा है और फिलहाल खतरे के निशान 178.765 मीटर से नीचे बहाव बना हुआ है। विभाग जलस्तर पर लगातार निगरानी रखे हुए है।

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