गंगा घाट पर सूंड़ उठी और थम गया शोर: 200 साल पुराना रिश्ता निभाते हुए हाथी ने रामबेटी को यूं दी अंतिम विदाई
संभल के ब्यौरा गांव में 74 वर्षीय रामबेटी की अंतिम यात्रा में एक हाथी ने उन्हें भावुक विदाई दी। परिवार ...और पढ़ें
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दृश्य देखकर लोगों की आंखें हो गईं नम
जागरण संवाददाता, संभल। रजपुरा के गांव ब्यौरा में बुधवार को 74 वर्षीय रामबेटी की अंतिम यात्रा ने हर किसी को भावुक कर दिया। जिस हाथी की देखभाल में उन्होंने जीवन का लंबा समय बिताया, वही हाथी उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुआ।
राजघाट गंगा घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान हाथी ने सूंड़ उठाकर उन्हें अंतिम विदाई दी तो कुछ पल के लिए पूरा माहौल शांत हो गया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
रामबेटी के बेटे मनवीर सिंह के मुताबिक उनके परिवार में करीब 200 वर्षों से हाथी पालने की परंपरा रही है। उनके पिता नत्थू सिंह भी हाथी पालते थे। करीब 13 वर्ष पहले पिता के निधन के बाद रामबेटी ने हाथियों की देखभाल की जिम्मेदारी संभाल ली थी।
वह उनकी खुराक से लेकर नहलाने और देखभाल तक का पूरा ध्यान रखती थीं। परिवार के अनुसार हाथी भी उनकी आवाज पहचानते थे। परमा और मोहन नाम के हाथियों से रामबेटी का विशेष लगाव था।
करीब पांच वर्ष पहले परिवार ने दोनों हाथियों को बेच दिया था, लेकिन रामबेटी और हाथियों के बीच वर्षों में बना आत्मीय रिश्ता खत्म नहीं हुआ। नत्थू सिंह की अमरोहा के उझारी निवासी मतीन से पुरानी दोस्ती थी।
इसी संबंध के चलते मतीन की ओर से हाथी को रामबेटी की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए लाया गया। गांव से राजघाट गंगा घाट के लिए शवयात्रा रवाना हुई तो हाथी सबसे आगे चल रहा था।
उसके पीछे रामबेटी का शव और सैकड़ों ग्रामीण चल रहे थे। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। करीब 600 लोगों की मौजूदगी में यात्रा घाट तक पहुंची। रास्ते में हाथी को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुटती रही।
सूंड़ उठी तो थम गया शोर
अंतिम संस्कार के दौरान हाथी ने अचानक सूंड़ उठाई तो वहां मौजूद लोगों की निगाहें उसी पर टिक गईं। कुछ पल के लिए माहौल बिल्कुल शांत हो गया। ग्रामीणों ने इसे रामबेटी के प्रति हाथी की आत्मीय विदाई माना।
मनवीर सिंह ने बताया कि उनकी मां की इच्छा थी कि उनकी अंतिम यात्रा हाथी के साथ निकले। परिवार के पास फिलहाल कोई हाथी नहीं है। ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ऐसी अंतिम यात्रा देखी, जिसमें इंसान नहीं बल्कि हाथी भी अपने पुराने रिश्ते को निभाने के लिए साथ चला और अपनी तरह से अंतिम विदाई दी।
