विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

संभल मस्जिद विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सर्वे के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई पूरी, अब फैसले पर टिकीं निगाहें

Published: Fri, 25 Sep 2026 10:03 PM (IST)

संभल की शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के सर्वे आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

संभल मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट में सर्वे के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई पूरी।

संभल मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट में सर्वे के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई पूरी।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने संभल मस्जिद-मंदिर विवाद पर अपना फैसला सुरक्षित रखा।

  2. निचली अदालत के सर्वे आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई।

  3. पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 का भी उल्लेख किया गया।

जागरण संवाददाता, संभल। संभल की शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद में निचली अदालत के सर्वे आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने जामा मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई की।

संबंधित मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 19 मई 2025 के आदेश को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में भी इस मामले में हाई कोर्ट के इसी आदेश के विरुद्ध दायर एसएलपी का उल्लेख है।

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि राज्य किसी भी पक्ष के दावे में नहीं जाना चाहता और सभी के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का भी उल्लेख किया। मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने दलीलें रखीं, जबकि कुछ हिंदू पक्षों की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पक्ष रखा।

मस्जिद कमेटी की ओर से 1991 के कानून की व्याख्या का मामला सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ के समक्ष लंबित होने का भी हवाला दिया गया। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और जामा मस्जिद के सदर जफर अली ने बताया कि फैसला सुरक्षित रख लिया गया है।

क्या है पूजा स्थल कानून

पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 में 15 अगस्त 1947 को किसी पूजा स्थल का जो धार्मिक स्वरूप था, उसे बनाए रखने का प्रावधान है। कानून में पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप में बदलाव से संबंधित दावों पर रोक का प्रावधान किया गया है। हालांकि, अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया था।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 12 दिसंबर 2024 के आदेश का भी संदर्भ आया। उस आदेश में अदालतों को धार्मिक स्थलों, खासकर मस्जिदों और दरगाहों के धार्मिक स्वरूप को लेकर नए मुकदमों पर विचार करने तथा लंबित मामलों में प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने से संबंधित निर्देश दिए गए थे। यह आदेश 1991 के पूजा स्थल कानून के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आया था।

नवंबर 2024 में शुरू हुआ था विवाद

संभल की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में वर्ष 2024 में दायर वाद में दावा किया गया था कि मुगल शासक बाबर ने हरिहर मंदिर को तोड़कर उसके स्थान पर मस्जिद का निर्माण कराया था। इसी वाद में अदालत ने 19 नवंबर 2024 को सर्वे के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया था। बाद में सर्वे को लेकर विवाद बढ़ा और 24 नवंबर को हुए घटनाक्रम के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।

जामा मस्जिद प्रबंधन समिति ने सर्वे आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया था। हाई कोर्ट ने 19 मई 2025 को कमेटी की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए पक्षकारों को उचित न्यायिक मंच पर जाने को कहा था और संभल में शांति एवं सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया था।

साथ ही कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। शुक्रवार की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। ऐसे में अब सभी पक्षों की निगाहें शीर्ष अदालत के फैसले पर टिकी हैं। फैसले से आगे की न्यायिक प्रक्रिया की दिशा स्पष्ट होगी।

यह भी पढ़ें- इलाहाबाद HC ने एसी स्लीपर बसों की सुरक्षा पर उठाए सवाल, कहा- बिना उचित जांच व सुरक्षा उपायों के चलाई जा रही