2 साल पहले हो चुकी थी बेटे की मौत, फिर पिता ने रची 50 लाख के बीमा की ऐसी साजिश... बहू के एक बयान ने खोला राज!
संभल में एक पिता ने अपने मृत बेटे के नाम पर बीमा पॉलिसी कराकर 50 लाख रुपये का क्लेम लेने ...और पढ़ें

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HighLights
बीमा कंपनी की शिकायत पर पिता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
मृत्यु प्रमाणपत्र, पुलिस की जीडी और पंचनामा समेत कई दस्तावेजों में गड़बड़ी का आरोप
जागरण संवाददाता, संभल। मृत व्यक्ति के नाम पर बीमा पालिसी कराकर सड़क हादसे में मृत्यु दर्शाते हुए 50 लाख रुपये का क्लेम लेने की कोशिश करने का मामला सामने आया है।
निजी स्वास्थ्य बीमा कंपनी निवा बूपा की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार मुरादाबाद के एकता कालोनी निवासी सचिन कुमार की मृत्यु आठ फरवरी 2024 को हो चुकी थी।
जबकि उनके नाम पर 27 जून 2026 को बीमा पालिसी जारी कराई गई। इसके बाद अगस्त 2026 में संभल के रजपुरा थाना क्षेत्र में सड़क हादसे में मृत्यु होने का दावा करते हुए 50 लाख रुपये के क्लेम के लिए आवेदन किया गया।
बीमा कंपनी की जांच में दस्तावेजों में कथित हेराफेरी सामने आने के बाद पुलिस से शिकायत की गई। मामले में पिता नेमपाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
थाना प्रभारी संदीप कुमार ने बताया कि बीमा कंपनी के अधिकारी दिनेश गुप्ता की ओर से दी गई शिकायत के मुताबिक पिता नेमपाल सिंह ने अपने बेटे सचिन कुमार के नाम पर 50 लाख रुपये की बीमा पाॅलिसी ली थी।
वह स्वयं इस पालिसी में नामिनी थे। इसके लिए 5,179 रुपये का प्रीमियम जमा किया गया था। पालिसी 27 जून 2026 को जारी हुई थी। इसके बाद 14 सितंबर 2026 को सचिन कुमार की मृत्यु के संबंध में 50 लाख रुपये का क्लेम प्रस्तुत किया गया।
कंपनी ने क्लेम की जांच के लिए अमेबल कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी थी। कंपनी की ओर से कराई गई जांच में सामने आया कि सचिन कुमार की वास्तविक मृत्यु आठ फरवरी 2024 को हुई थी।
इसके लिए मृत्यु संबंधी मूल अभिलेखों, मृतक की पत्नी के लिखित बयान और स्थानीय नगर निकाय के पार्षद से मिली पुष्टि का हवाला दिया गया है।
इसके बावजूद मृत्यु के दो साल से अधिक समय बाद बीमा पॉलिसी जारी कराए जाने और अगस्त 2026 में सड़क हादसे में मृत्यु दर्शाने पर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि क्लेम के समर्थन में प्रस्तुत पुलिस की जीडी/डीडी प्रविष्टि, पंचनामा और अन्य संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो वे कथित तौर पर फर्जी या वास्तविक अभिलेखों से मेल नहीं खाते पाए गए।
मृतक की पत्नी की ओर से भी लिखित घोषणा दिए जाने का उल्लेख है, जिसमें क्लेम से जुड़े दस्तावेजों को कथित तौर पर फर्जी बताया गया है।
बीमा कंपनी ने मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और संभावित आपराधिक साजिश की जांच कराने की मांग की है। प्राथमिकी दर्ज की है। उपनिरीक्षक विनोद कुमार को विवेचना सौंपी गई है। घटनास्थल कागजों में रजपुरा थाना क्षेत्र दर्शाया गया है। इसलिए मुकदमा रजपुरा थाने में दर्ज हुआ है।
