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संभल में कांग्रेस का 46 साल का ‘वनवास’ होगा खत्म या और बढ़ेगी रार? चुनाव से पहले लगी इस्तीफों की बौछार

Published: Fri, 18 Sep 2026 06:00 AM (IST)

संभल में कांग्रेस 46 साल के चुनावी वनवास से जूझ रही है, जहां 2027 के चुनावों से पहले डेढ़ महीने ...और पढ़ें

संभल में कांग्रेस का जिला कार्यालय। जागरण

संभल में कांग्रेस का जिला कार्यालय। जागरण

HighLights

  1. रार और घमासान में फंसी पार्टी, चुनावी रण भेदने की चुनौती

  2. डेढ़ महीने में पांच पदाधिकारियों के इस्तीफे से संगठन पर उठे सवाल

गौरव वर्मा, संभल। 2027 का चुनावी रण सजने से पहले संभल में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी खोई सियासी जमीन तलाशने की है। जिस सीट पर वर्ष 1980 में कांग्रेस ने आखिरी बार जीत का स्वाद चखा था, वहां 46 साल से पार्टी विधानसभा की चौखट नहीं लांघ सकी है। अब जब चुनावी तैयारियां शुरू हुई हैं तो संगठन के भीतर सामने आए इस्तीफों ने पार्टी की राह और मुश्किल कर दी है।

पिछले करीब डेढ़ महीने में पांच पदाधिकारियों के इस्तीफे की चर्चा ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कांग्रेस सपा के मजबूत आधार वाले संभल में चुनावी मुकाबले के लिए संगठन को कितनी मजबूती से एकजुट कर पाएगी।

संभल विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसका लंबा चुनावी वनवास है। वर्ष 1980 में कांग्रेस के टिकट पर शरीयतुल्ला विधायक बने थे। उस चुनाव में भारतीय क्रांति दल के प्रत्याशी रहे स्व. डाॅ. शफीकुर्रहमान बर्क को हार का सामना करना पड़ा था।

इसके बाद चुनाव दर चुनाव कांग्रेस मैदान में उतरती रही, रणनीति बनती रही, हार के कारणों का गुणा-भाग होता रहा, लेकिन जीत उसके खाते में नहीं आई। समय के साथ संभल की सियासत में समाजवादी पार्टी का प्रभाव मजबूत होता गया।

ऐसे में कांग्रेस के सामने सिर्फ चुनाव लड़ने की नहीं, बल्कि मतदाताओं के बीच फिर से अपनी राजनीतिक जगह बनाने की चुनौती है। 2027 का चुनाव इसी लिहाज से पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है।

कांग्रेस चुनावी तैयारियों को धार देने में जुटी थी कि पिछले डेढ़ महीने में संगठन के भीतर इस्तीफों का सिलसिला चर्चा में आ गया। जिला महासचिव सफी सैफी और मंजर अब्बास, सचिव इतरत हुसैन बाबर तथा शहर कांग्रेस कमेटी के सचिव अंजार मंसूरी और कलीम अंसारी ने अलग-अलग कारणों से इस्तीफा देने की बात सामने आई।

किसी का असंतोष पद से जुड़ा बताया गया तो किसी की नाराजगी जिला संगठन के पदाधिकारी से रही। जिलाध्यक्ष आरिफ तुर्की का दावा है कि किसी भी पदाधिकारी का इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि आपसी मनमुटाव के कारण कभी-कभी ऐसी स्थिति बन जाती है, लेकिन अब कोई नाराजगी नहीं है। मंजर अब्बास बाद में आईटीआई के जिलाध्यक्ष बन गए हैं। सभी कांग्रेसी मिलकर पार्टी को मजबूत करने में जुटे हैं। 2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन संभल में सियासी तैयारियों ने रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है।

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