सड़क हादसे में घायलों को 1.5 लाख तक मुफ्त कैशलेस इलाज: बीमा हो या न हो, इलाज का खर्च उठाएगी सरकार
सड़क दुर्घटना पीड़ितों को अब 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मुफ्त मिलेगा, चाहे वाहन का बीमा हो या ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, संभल। सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों के आंकड़े कम करने और घायलों को बिना किसी देरी के चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए एक बेहद अहम कैशलेस इलाज योजना लागू की जा रही है।
बीमा हो या न हो, इलाज का खर्च उठाएगी सरकार और इंश्योरेंस कंपनी
संभल के एआरटीओ अमिताभ चतुर्वेदी ने बताया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 164बी के तहत स्थापित 'मोटर वाहन दुर्घटना कोष' के जरिए अब सड़क हादसे के शिकार प्रत्येक व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मुफ्त मिलेगा। यह जीवन रक्षक सुविधा दुर्घटना के दिन से अधिकतम सात दिनों तक लागू रहेगी।
10 दिन में क्लेम सेटलमेंट की गारंटी
सबसे अहम बात यह है कि दुर्घटना करने वाले वाहन का बीमा हो या न हो, घायल व्यक्ति का इलाज नहीं रुकेगा। इसका पूरा खर्च सरकार और बीमा कंपनियां उठाएंगी। यह योजना मुख्य रूप से पीएमजेएवाई में सूचीबद्ध अस्पतालों में मिलेगी, जिसकी पूरी प्रक्रिया को टीएमएस 2.0 और ई-डार पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है।
पुलिस वेरिफिकेशन के लिए 24 से 48 घंटे की सख्त डेडलाइन
खास बात यह है कि हादसे के बाद यदि घायल व्यक्ति बिना पुलिस की मदद के सीधे अस्पताल पहुंचता है, तो भी इलाज में कोई कागजी अड़चन नहीं आएगी। जानलेवा या गंभीर चोट के मामलों में अस्पताल तुरंत पूरा इलाज शुरू कर देगा और टीएमएस पर घायल व्यक्ति की सूचना भरेगा जो स्वतः ई डार पर प्रदर्शित होगा, जिसे संबंधित थानाध्यक्ष देख सकेगा।
देरी होने पर डीजीपी तक पहुंचेगा मामला
वहीं, सामान्य चोट के मामलों में अस्पताल तुरंत ''स्टेबलाइजेशन'' (प्राथमिक) इलाज शुरू करेगा और ई-डार पर पुलिस की पुष्टि के बाद आगे का फुल ट्रीटमेंट किया जाएगा। घायल की पहचान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ई-डार पर एक विशेष ''विक्टिम आईडी'' जनरेट करेगी जिसे अस्पताल के डेटा से लिंक किया जाएगा।
पुलिस वेरिफिकेशन के लिए 24 घंटे की डेडलाइन
इस पूरी योजना में पुलिस की भूमिका को बेहद जवाबदेह और समयबद्ध बनाया गया है। जानलेवा और गंभीर चोट के मामलों में पुलिस को महज 48 घंटे के भीतर ई-डार पोर्टल पर दुर्घटना का वेरिफिकेशन करना होगा। अन्य सामान्य मामलों में यह समयसीमा अधिकतम 24 घंटे तय की गई है।
यदि संबंधित थाना या अधिकारी इस तय समय में वेरिफिकेशन नहीं करते हैं, तो सिस्टम के जरिए यह मामला स्वतः ही डीजीपी के लॉग-इन में एस्केलेट हो जाएगा। यदि ई-डार पर केस रिजेक्ट होता है, तो मरीज को योजना से बाहर कर दिया जाएगा और इलाज का खर्च उसे स्वयं उठाना होगा।
10 दिन में क्लेम का 'ऑटो-अप्रूवल' और भुगतान
अस्पताल द्वारा मरीज के डिस्चार्ज होने के बाद क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया बेहद तेज होगी। स्टेट हेल्थ एजेंसी डेटा फिल्टर करके यह तय करेगी कि दुर्घटना करने वाले वाहन का बीमा है या नहीं। यदि वाहन बीमित है, तो क्लेम का भुगतान 'जनरल इंश्योरेंस काउंसिल' के जरिए किया जाएगा। यदि वाहन का बीमा नहीं है, तो भुगतान जिलाधिकारी के माध्यम होगा, जो केंद्र सरकार के बजटीय समर्थन वाले पीएफएमएस अकाउंट से होगी।
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि यदि 10 दिनों के भीतर जीआई काउंसिल या जिलाधिकारी की तरफ से कोई जवाब नहीं आता है, तो सिस्टम क्लेम को ''डीम्ड अप्रूवल'' (स्वतः स्वीकृत) मानकर अस्पताल को भुगतान कर देगा।
यह भी पढ़ें- Weather Today: संभल में भीषण गर्मी का अलर्ट, आज से लू की चेतावनी; 27 मई तक 47 डिग्री पहुंचेगा पारा
यह भी पढ़ें- संभल एसपी केके बिश्नोई की नई पहल: 5 हेड कॉन्स्टेबल को बनाया चौकी प्रभारी, महिला उपनिरीक्षकों को भी मिली कमान
