सिरसी, जासं: यहां से पांच किलोमीटर दक्षिण में स्थित ग्राम फिरोजपुर में किले वाली शाही जामा मस्जिद को सय्यद फिरोज शाह ने 1643 ई. 1065 हिजरी में तामीर कराया था। मस्जिद के ऊपर तीन शानदार गुंबद और चार छोटी मीनारें हैं। इस ऐतिहासिक मस्जिद की बनावट मुगल कालीन वास्तु कला का एक बेहतरीन नमूना है। मस्जिद का बरामदा 2016 में बनवाया गया है।

जिले के फिरोजपुर गांव में मुगल बादशाह शाहजहां के सेनापति सय्यद फिरोजशाह आकर बसे थे। उन्होंने यहा पर एक किले का निर्माण कराया था। किले के नजदीक ही उन्होंने नमाज पढ़ने के लिये शाही जामा मस्जिद की तामीर कराई। कहा जाता है कि सय्यद फिरोजशाह के नाम से ही इस गांव का नाम फिरोजपुर पड़ा। इस मस्जिद में सय्यद फिरोजशाह अपने सैनिकों और खादिमों के साथ नमाज अदा करते थे। मस्जिद की बराबर में एक प्राचीन कुआं है जो अब सूख चुका है। इसी कुएं के पानी से पुराने जमाने मे लोग वजू करके नमाज पढ़ते थे। किले के नजदीक ही सोत नदी बहती है। शासन प्रशासन व लोगों की उपेक्षा के चलते यह नदी भी सूख गई है। शाही मस्जिद में नमाजियों के आने जाने के लिये तीन दिशाओं में तीन गेट बने हुए हैं। मस्जिद के मुतवल्ली हाजी साबिर हुसैन 50 साल से मस्जिद की देखभाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वजू करने के लिये टंकिया लगवा दी गई है जिनसे एक बार में पचास लोग वजू कर सकते हैं।

शाही जामा मस्जिद में मौलाना शरीफ अहमद 1994 से लगातार नमाज अदा कराने के फराइज अंजाम दे रहे हैं। बताते हैं शाही जामा मस्जिद में 1500 लोग एक साथ नमाज अदा कर सकते है। मस्जिद में 27 रमजान को कुरान पाक मुकम्मल हो जाएगा।

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Posted By: Jagran

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