सिरसी : शहीदाने कर्बला की याद में बुधवार पहली मोहर्रम को इमामबारगाह और अजाखानों में मजलिसे आयोजित की गई। अलम मुबारक का जुलूस निकाला गया। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना हैदर अब्बास नकवी ने कहा कि मोहर्रम कोई त्योहार नहीं यह गम का महीना है।

उन्होंने कहा कि मजलिसे हमारी दर्स गाहे हैं। दीन को बचाने के लिये हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला में कुर्बानिया पेश की थी। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन (अ) का गम हजरत आदम ने भी मनाया था। वह जब दुनिया में घूम रहे थे तो कर्बला के मैदान में जाकर रन्जीदा हो गए थे। उन्होंने खुदा से पूछा था कि यह कौन सी जगह है जहां आकर मेरा दिल परेशान हो गया है। हजरत जिब्राइल ने उन्हें बताया था कि यह कर्बला है यहां हजरत मोहम्मद (स) का नवासा शहीद किया जायेगा। यह सुनकर हजरत आदम भी रोये थे। पहली मोहर्रम पर मोहल्ला चौधरियान स्थित स्व. असकरी हसन के अजाखाने से अलम मुबारक का जुलूस निकाला गया। इसमें स्थानीय मातमी अंजुमनों ने मातम और नोहा ख्वानी की।

जुलुस मरकजी इमामबारगाह जाकर सम्पन्न हुआ। इस दौरान जकी हसन, वसी हसन, नकी हसन काजिम,शन्नू आदि शामिल रहे। इमामबारगाह सादात में अशराये मजलिस में मौलाना मोहम्मद अब्बास जैदी ने खिताब फरमाया। मरकजी इमाम बारगाह में देहली से आये मौलाना मोहसिन तकवी ने मजलिस को खिताब फरमाया। गुरुवार को मोहल्ला सराय सादक में दो मोहर्रम पर अजाखाना मरहूम गुलाम सामिन से जुलजुनाह का जुलूस निकाला जाएगा। खराब मौसम के बावजूद बुधवार पहली मोहर्रम पर सभी इमाम बारगाहो और अजाखानों में सुबह से शाम तक मजलिसों का सिलसिला जारी रह।

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