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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 08, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

श्रीकृष्ण के बाल रूप की होती है विशेष उपासना

By JagranEdited By:
Published: Fri, 08 Dec 2017 12:42 AM (IST)

चन्दौसी : गोशाला रोड स्थित आरएस इंटर कॉलेज में श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास र

श्रीकृष्ण के बाल रूप की होती है विशेष उपासना
श्रीकृष्ण के बाल रूप की होती है विशेष उपासना

चन्दौसी : गोशाला रोड स्थित आरएस इंटर कॉलेज में श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास राधाजी ने कहा कि कृष्ण के सारे जीवन में उनका बचपन बहुत ही मधुर है। बाल कृष्ण की ही विशेष उपासना की जाती है। श्रीकृष्ण का ग्वालवालों के साथ गाय चराना, खाना-खेलना समाज के प्रति दृष्टिकोण को दर्शाता है। ------------------

बिन सत्संग विवेक न होई..

चन्दौसी : शक्ति नगर स्थित मंदिर शिव शक्ति धाम में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास कृष्ण रति दासी ने हरि भजन का महत्व बताते हुए मनुष्य जीवन में होने वाले परिवर्तन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ईश्वर प्राप्ति का सबसे बड़ा खजाना हरि भजन है, जिसमें महिलाओं व पुरुषों द्वारा यह संकल्प लिया गया कि हम दैनिक जीवन में सब बुराइयों को छोड़कर हरि भजन व उसकी भक्ति को अपने जीवन में उतारे। उन्होंने कहा कि हमें एक ही भक्ति करनी चाहिए, जिस तरह जगह-जगह गड्ढा खोदने से पानी नहीं निकलता, इसी प्रकार दर-दर भटकने से प्रभु भक्ति नहीं मिलती। यदि मनुष्य सारा ध्यान भजन पर केंद्रित करें तो तुलसीदास की तरह प्रभुराम की भक्ति हर मनुष्य को प्राप्त हो जाएगी और वह मनुष्य भवसागर से पार हो जाएगा। सभी को सत्संग करना चाहिए। उन्होंने बिन सत्संग विवेक न होई, भजन कर सभी को भाव विभोर कर दिया।