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अपनों ने मुंह मोड़ा तो यहां मिला 'परिवार': 62 बुजुर्गों की आंखों में दर्द, पर चेहरे पर फिर लौटी मुस्कान

Published: Thu, 01 Oct 2026 05:38 AM (IST)

चंदौसी के वृद्धाश्रम में 62 बुजुर्गों को नया घर मिला है, जहाँ अपनों द्वारा छोड़े जाने के बाद भी वे ...और पढ़ें

संभल के चंदौसी में चल रहा वृद्धाश्रम। जागरण

संभल के चंदौसी में चल रहा वृद्धाश्रम। जागरण

HighLights

  1. झुर्रियों में छिपी जिंदगी की लंबी कहानियां, शरीर ने साथ छोड़ा, अपनों ने मुंह मोड़ा...फिर भी चेहरे पर मुस्कान

गौरव वर्मा, संभल। उम्र की ढलती शाम में सबसे ज्यादा जरूरत होती है अपनों के साथ की। कोई दो घड़ी पास बैठकर हाल पूछ ले, कोई दवा समय पर दे दे और कोई बस इतना कह दे-‘आप चिंता मत करो, हम हैं।’ मगर चंदौसी के वृद्धाश्रम में रह रहे 62 बुजुर्गों की जिंदगी में शायद यह अपनापन कहीं पीछे छूट गया।

शरीर कमजोर हुआ तो कई अपनों से दूर हो गए। किसी को परिवार का सहारा नहीं मिला तो किसी की जिंदगी में अकेलापन दस्तक दे गया। मगर इन सबके बीच जिंदगी से हार मान लेना इन बुजुर्गों ने नहीं सीखा।

इस वृद्धाश्रम की स्थापना अप्रैल 2017 में बहजोई मार्ग स्थित गांव बबैना में हुई लेकिन, 10 अक्टूबर 2023 से यह आश्रम चंदौसी में कैथल गेट के पास रामबाग रोड पर शिफ्ट हो गया।

वृद्धाश्रम में ताश खेलकर समय बिताते वृद्ध। सौ संचालक

इसकी जिम्मेदारी जनहितकारी सेवा समिति रामनगर, अलीगढ़ संभाल रही है। यहां पर 62 बुजुर्ग जीवन यापन कर रहे हैं। वृद्धाश्रम में प्रवेश करते ही चेहरे पर उम्र की लकीरें नजर आती हैं, लेकिन आंखों में मायूसी नहीं।

कोई दूसरे बुजुर्ग के साथ बैठकर बात कर रहा है तो कोई ताश की बाजी में व्यस्त है। कोई बीते दिनों की यादें साझा कर रहा है तो कोई अपने साथी की बात सुनकर मुस्कुरा रहा है।

जिंदगी की शाम जरूर है, लेकिन यहां जीने की लालसा अब भी बरकरार है। रामवीर सिंह, प्रेमवती देवी, राजेंद्र सिंह, प्रकाश, महावीर सिंह, सत्यस्वरूप, पूरन देवी और शिव देवी समेत यहां रह रहे बुजुर्गों की उम्र 60 वर्ष या इससे अधिक है।

इनमें ज्यादातर बुजुर्ग संभल जिले के हैं, जबकि कुछ बदायूं की सीमा से लगे क्षेत्रों के रहने वाले हैं। यहां रहने वाले बुजुर्गों के लिए सुबह नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन तथा दूध की व्यवस्था है।

वृद्धाश्रम में मौजूद बुजुर्ग । जागरण

समाज कल्याण विभाग की ओर से प्रत्येक वृद्ध के भरण-पोषण के लिए प्रतिदिन 114 रुपये का भुगतान किया जाता है। वृद्धाश्रम के संचालक जितेंद्र कुमार बताते हैं कि यहां रहने वाले बुजुर्गों को जरूरत की सभी सुविधाएं देने का प्रयास किया जाता है। यहां का माहौल ऐसा रखने की कोशिश रहती है कि उन्हें अपने घर से दूर होने का अहसास न हो।

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