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मुलायम के गढ़ में विरासत की जंग, यूपी विधानसभा चुनाव के लिए सपा की राह में भाजपा ने रचा 'चक्रव्यूह'

Published: Tue, 20 Oct 2026 12:55 PM (IST)

संभल की गुन्नौर विधानसभा सीट पर मुलायम सिंह यादव की विरासत और वर्तमान जनाधार को लेकर सपा-भाजपा में सियासी जंग तेज है।

पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव। (तस्वीर- फाइल)

पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव। (तस्वीर- फाइल)

HighLights

  1. गुन्नौर सीट पर मुलायम सिंह यादव की रिकॉर्ड जीत।

  2. सपा-भाजपा में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज।

  3. स्थानीय मुद्दे और प्रत्याशी चयन निर्णायक साबित होंगे।

सौरव प्रजापति, संभल। मुलायम सिंह यादव की रिकॉर्ड जीत से पहचान बनाने वाली गुन्नौर विधानसभा सीट पर सियासत का केंद्र अब विरासत के साथ वर्तमान जनाधार बन गया है।

समाजवादी पार्टी इस सीट को मुलायम सिंह यादव के दौर से जुड़े अपने पुराने प्रभाव के रूप में देख रही है, जबकि भाजपा के सामने 2022 में गंवाई सीट पर दोबारा कब्जा जमाने की चुनौती है।

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी गुन्नौर क्षेत्र में सपा को बढ़त मिली थी। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के लिए यहां का सियासी गणित अहम हो गया है।

वर्ष 2004 में मुख्यमंत्री बनने के बाद मुलायम सिंह यादव ने गुन्नौर विधानसभा सीट पर उपचुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 1,95,213 मत मिले, जबकि बसपा प्रत्याशी आरिफ अली को 11,314 मत प्राप्त हुए थे। दोनों के बीच जीत का अंतर करीब 1.84 लाख मतों का रहा।

यह नतीजा गुन्नौर के चुनावी इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल है। वर्ष 2007 में भी मुलायम सिंह यादव ने इस सीट से जीत दर्ज की। उनके बाद भी सपा का प्रभाव बना रहा, लेकिन 2017 में भाजपा ने जीत दर्ज कर इस सिलसिले को तोड़ दिया।

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के अजीत कुमार उर्फ राजू यादव ने सपा के रामखिलाड़ी सिंह को हराया था। पांच साल बाद 2022 में रामखिलाड़ी सिंह यादव ने वापसी करते हुए भाजपा प्रत्याशी को पराजित कर दिया।

इन नतीजों ने स्पष्ट किया कि गुन्नौर में किसी दल का प्रभाव स्थायी नहीं है। यहां प्रत्याशी की स्वीकार्यता, स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय मुद्दे चुनावी परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। गुन्नौर की सियासत में विकास के मुद्दे भी निर्णायक रहेंगे।

गंगा के आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ और जलभराव से ग्रामीणों को परेशानी होती है। गुन्नौर, जुनावई और राजपुरा क्षेत्र के गांवों में बाढ़ के दौरान आवागमन और राहत व्यवस्था भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकती है।

ऐसे में 2027 के चुनाव में सपा के सामने मुलायम सिंह यादव की विरासत को वर्तमान जनसमर्थन में बदलने की चुनौती होगी, जबकि भाजपा को अपने पुराने प्रभाव की वापसी के लिए जमीन मजबूत करनी होगी। दोनों दलों की रणनीति, प्रत्याशी चयन और जनता के बीच सक्रियता ही इस सीट के सियासी मुकाबले की दिशा तय करेगी।

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गुन्नौर में पांच सौ से अधिक सपा के बूथ हैं। जिनके भरोसे हम 2027 का चुनाव फतेह करेंगे। गुन्नौर सपा है गढ़ है, स्व. मुलायम सिंह यादव के नाम से ही इस विधान सभा सीट की पहचान है। मौजूदा समय में सपा के ही विधायक हैं। क्योंकि भाजपा की सरकार में वहां पर विकास नहीं हुआ है। - असगर अली अंसारी, जिलाध्यक्ष, सपा।

भाजपा पूरी तैयारी के साथ मैदान में है। लगभग 400 बूथों पर तैयारी कर चुनावी बिगुल फूंका जा चुका है। 2017 में गुन्नौर से भाजपा जीती थी और अब 2027 में फिर जीत हासिल होगी। क्योंकि भाजपा के समय में हर वर्ग का विकास किया जा रहा है।

हरेंद्र सिंह उर्फ रिंकू, जिलाध्यक्ष, भाजपा।