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गूगल पर छाई डॉ. रैना की 'भीख से सीख' मुहिम: हाथों में कटोरा थामने वाले 60 बच्चे पहुंचे स्कूल, गणतंत्र दिवस परेड में भी चमकें

Published: Fri, 16 Oct 2026 12:45 PM (IST)

डॉ. रैना शर्मा की 'भीख से सीख' मुहिम ने संभल में 60 बच्चों को शिक्षा से जोड़ा और 25 लोगों ...और पढ़ें

संभल में बच्चों व अभिभावक को समझातीं डाॅ. रैना शर्मा। स्रोत स्वयं

संभल में बच्चों व अभिभावक को समझातीं डाॅ. रैना शर्मा। स्रोत स्वयं 

HighLights

  1. एक साल में 60 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाईं

  2. 30 बच्चों ने लखनऊ की गणतंत्र दिवस परेड में किया जिले का प्रतिनिधित्व

सौरव प्रजापति, संभल। कभी चौक-चौराहों पर रुकने वाले राहगीरों के आगे हाथ फैलाने वाले आज आत्मनिर्भर बनने की राह पर हैं। नन्हें हाथों ने कलम और कापी-किताब थाम ली है। वहीं, बड़े लोगों पर मेहनत-मजदूरी या स्वरोजगार में लग गए हैं। यह संभव हुआ चंदौसी के माडल कालेज के सोशल वर्क विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. रैना शर्मा की सोच है।

वह कक्षा में सामाजिक कार्य का पाठ ही नहीं पढ़ातीं, बल्कि हकीकत में भी जरूरतमंदों को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रहीं हैं। करीब एक साल पहले शुरू हुई भीख से सीख पहल के जरिये उन्होंने भीख मांगने वालों को सम्मानजनक जीवन से जोड़ने का प्रयास किया।

अब तक 60 बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जा चुका। वहीं, 25 रोजगार से जुड़े। यही नहीं, 30 बच्चे इसी वर्ष 26 जनवरी को लखनऊ में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में शामिल ही नहीं हुए, प्रदेश में तीसरा स्थान भी हासिल किया।

मालवीय चौक निवासी डाॅ. रैना शर्मा फिजियोथेरेपिस्ट भी हैं। गुरुग्राम, हरिद्वार समेत कई अस्पतालों में पांच-छह साल नौकरी के दौरान उन्होंने जगह-जगह भीख मांगने वालों को देखा।

इसने उनके सोचने का नजरिया बदल दिया। इस पर समाज के निराश्रित, गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए काम शुरू किया। 2020 में हरि कृपा फाउंडेशन की स्थापना की। करीब एक साल पहले ‘उम्मीद’ संस्था व जिला प्रशासन की मदद से भीख से सीख प्रोजेक्ट शुरू किया।

तत्कालीन डीएम डाॅ. राजेंद्र पैंसिया के सहयोग से भीख मांगने वाले बच्चों, युवाओं और महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जोड़कर समाज की मुख्यधारा में लाए।

सड़क किनारे रहने वाले कई परिवारों का आशियाना अब कांशीराम आवास है। 25 को स्वनिधि से समृद्धि, वीबी-जीरामजी आदि के जरिये रोजगार से जोड़ा गया। भीख मांगने वाले 60 बच्चों को स्कूल पहुंचाया जा चुका है।

बीच-बीच में जाकर परिवार की काउंसिलिंग भी की जाती है। इसका असर बच्चों के जीवन में भी दिखाई दिया। गणतंत्र दिवस परेड की करीब दो माह तक पुलिस लाइन में रिहर्सल के बाद जिले की टोली ने मुकाम हासिल किया।

हर माह 20 से अधिक किशोरियों की काउंसिलिंग

किशोरियों के लिए भी डाॅ. रैना लगातार काम कर रही हैं। हर माह 20 से अधिक किशोरियों की समस्याएं सुनी जाती हैं। उनके अधिकार, शिक्षा का महत्व, स्वास्थ्य और जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों के प्रति जागरूक किया जाता है। जिससे वे अधिकारों के प्रति सजग हों और आत्मनिर्भर बनें।

केंद्र की स्माइल योजना में चयनित हुई पहल

भीख से सीख पहल को केंद्र सरकार की स्माइल योजना में भी मई 2026 में स्थान मिला है। योजना के तहत भिक्षावृत्ति में लगे लोगों के पुनर्वास, शिक्षा, कौशल विकास और सम्मानजनक जीवन से जोड़ने पर जोर दिया जाता है। स्थानीय स्तर पर शुरू हुई यह पहल अब सरकारी योजना के दायरे में आकर व्यापक स्तर पर जरूरतमंदों को मुख्यधारा से जोड़ रही है।

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