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30 लाख खर्च... फिर भी जर्जर दीवारों पर डाला जा रहा लिंटर! चंदौसी की इस सरकारी कॉलोनी में बड़ा खतरा

Published: Fri, 25 Sep 2026 05:00 AM (IST)

चंदौसी की विश्व बैंक कॉलोनी में 30 लाख रुपये की लागत से हो रहे निर्माण कार्य पर सवाल उठे हैं। ...और पढ़ें

रजपुरा में नलकूप कालोनी में होता निर्माण कार्य।जागरण

रजपुरा में नलकूप कालोनी में होता निर्माण कार्य।जागरण

HighLights

  1. पुराने ढांचे पर ही लिंटर डालने की तैयारी, गुणवत्ता और निगरानी पर उठे सवाल

दानवीर सिंह यादव, रजपुरा (संभल)। करीब दो दशक से जर्जर हालत में बंद पड़ी विश्व बैंक कालोनी अब नए स्वरूप में विकसित की जा रही है लेकिन, निर्माण कार्य को लेकर ही सवाल खड़े हो गए हैं। सिचाई विभाग में नलकूप खंड चंदौसी के अंतर्गत आने वाली कालोनी में करीब 30 लाख रुपये की लागत से भवनों और परिसर का निर्माण कराया जा रहा है।

आरोप है कि जर्जर और कमजोर हो चुकी पुरानी दीवारों को हटाने के बजाय उन्हीं पर नया निर्माण कर लिंटर डालने की तैयारी है। ऐसे में भविष्य में यहां रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

कालोनी के पुराने भवन लंबे समय से उपयोग में नहीं थे। अब इन्हीं ढांचों को उपयोगी बनाने के लिए निर्माण कार्य शुरू किया गया है। आरोप है कि निर्माण में गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जा रहा है।

पुराने और कमजोर ढांचे पर ही नया निर्माण किए जाने से भविष्य में दीवारों के कमजोर होने या गिरने का खतरा बना रह सकता है। निर्माण कार्य में बिचौलियों की भूमिका होने की भी चर्चा है।

कालोनी परिसर की सुरक्षा के लिए बनाई जा रही बाउंड्रीवाल के निर्माण में भी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इसमें मानक के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

सरकारी आवास में भविष्य में अधिकारी और कर्मचारी रहेंगे। ऐसे में भवन की मजबूती और निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता उनकी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

इसके बावजूद मौके पर नियमित निगरानी नहीं होने के आरोप जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। विभाग की ओर से कालोनी में चल रहे निर्माण कार्य को मार्च तक पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है।

कर्मचारियों के लिए आवास की जरूरत को देखते हुए काम पूरा होना जरूरी है, लेकिन इसके साथ निर्माण की गुणवत्ता और पुराने ढांचे की मजबूती की जांच भी अहम है। सवाल यह है कि जर्जर दीवारों पर नया निर्माण करने से पहले उनकी तकनीकी मजबूती का आकलन किया गया है या नहीं।

 

रजपुरा में अवर अभियंता और नलकूप आपरेटरों के रहने के लिए सरकारी आवास की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। पुराने मकान जर्जर हो चुके थे। करीब 30 लाख रुपये की लागत से पुराने ढांचे को उपयोगी बनाकर नए लिंटर आदि का कार्य कराया जा रहा है, ताकि कर्मचारियों के लिए रहने योग्य आवास उपलब्ध हो सकें।

- महेंद्र शंकर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग


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