सम्भल। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं सोलह मार्च से शुरू हो रही हैं। बोर्ड की परीक्षाएं देने वाले छात्र-छात्राओं ने अपनी तैयारियां भी पूरी कर ली हैं। अब रिवीजन का समय चल रहा है परीक्षा से पहले कोर्स का बोझ और परीक्षा का तनाव लेकर छात्र-छात्राएं परेशान हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वह ऐसे समय में बच्चों का उत्साहवर्धन करें। उन पर कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी नहीं थोपें।

परीक्षाओं से पहले परीक्षार्थी व अभिभावक परीक्षाओं को लेकर ¨चता में रहते हैं कि कहीं वर्षभर की पढ़ाई बेकार न हो जाए। इस समय उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं हैं क्योंकि वर्षभर में स्कूल में जो बच्चों को सिखाया जाता है उसका आंकलन ही परीक्षाओं में होता है। परीक्षार्थी बगैर किसी अतिरिक्त बोझ के बोर्ड परीक्षाएं दें। अगर वह डिप्रेशन में रहेंगे तो उनका खान-पान बिगड़ जाएगा जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए परीक्षार्थी अपनी दिनचर्या व खान-पान पर ध्यान रखें।

इस संदर्भ में अभिभावकों से जब बातचीत की गई तो उनका भी यही कहना था कि इस समय बच्चों का उत्साहवर्धन करना चाहिए ओमप्रकाश ने कहा कि परीक्षाओं में छात्रों में अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहिए। छात्रों को उनकी क्षमता के आधार पर ही पढ़ाई करने देना चाहिए। अगर अभिभावक उन पर दवाब बनाएंगे तो वह डिप्रेशन में आ जाएंगे।

वहीं सतेंद्र कुमार माथुर कहते हैं कि परीक्षाओं के समय बच्चों के खान-पान पर ध्यान रखना चाहिए। उनके खेलकूद व मनोरंजन पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए। अगर बच्चे हर समय पढ़ाई करते रहेंगे तो मानसिक बोझ बढ़ जाएगा इसलिए कुछ समय उन्हें छूट देनी चाहिए।

दूसरी ओर छात्रा राशि कहती हैं कि

परीक्षाएं आते ही घर के सभी लोग हर समय पढ़ने का दवाब बनाते रहते हैं। जोकि उन्हें नहीं करना चाहिए। अपनी क्षमता के अनुरुप तैयारी पूरी कर ली है। परीक्षाओं का नाम सुनते ही दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं।

छात्र शोभित कुमार ने कहा कि परीक्षाएं आते ही दिलो-दिमाग में घबराहट होने लगती है कि पेपर किस प्रकार का आएगा। किस प्रकार से परीक्षा में बैठा जाएगा। शिक्षक व छात्र भी बाहर के होंगे लेकिन अगर परिवार का सहयोग मिले तो भय दूर हो जाएगा।

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इनसेट-

इन बातों का रखें विशेष ख्याल-

. पढ़ाई के लिए समय का प्रबंधन बहुत ही आवश्यक है।

. पढ़ाई के लिए स्थान एकांत होना चाहिए।

. अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चे से उसकी दिलचस्पी व योग्यता के आधार पर उम्मीद रखें।

. बच्चों के खेल-कूद व मनोरंजन पर प्रतिबंध न लगाएं।

. समय पर सोने व नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित करते रहें।

. मानसिक व शारीरिक आराम के लिए बीच-बीच में आराम करते रहें।

. खान-पान का विशेष ध्यान रखें।

. आत्मविश्वास व एकाग्रता में कमी न आने दें।

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वर्जन-

फोटो-18,परीक्षा बच्चों का संपूर्ण मूल्यांकन है। शिक्षक बच्चों को जो सिखाते हैं वहीं उन्हें परीक्षा में लिखना होता है। परीक्षाओं को लेकर अभिभावक बच्चों का उत्साहवर्धन करते रहें। उनके अंदर विश्वास पैदा करें जिससे बच्चों में आत्मविश्वास पैदा हो। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चे को परीक्षा उत्तीर्ण कराना ही सब-कुछ नहीं है उसे एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है।

डॉ. नीरज वशिष्ठ, शिक्षक

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