पीड़िता बोली- 11 वर्ष के संघर्ष के बाद मिला इंसाफ, सहारनपुर गैंगरेप केस में CO-SSI को 20 साल कैद से विभाग में हड़कंप
11 साल के संघर्ष के बाद पीड़िता को न्याय मिला, जिसमें अदालत ने दो पूर्व पुलिस अधिकारियों को 20-20 साल ...और पढ़ें

दोषी को लेकर जाती पुलिस।
HighLights
11 साल के संघर्ष के बाद पीड़िता को आखिरकार मिला न्याय
पूर्व एसएचओ और एसएसआई को 20-20 साल की सजा
पीड़िता ने कहा, लंबी लड़ाई रंग लाई, मिली राहत
संवाद सहयोगी, देवबंद (सहारनपुर)। 11 साल तक न्याय की आस में अदालतों की चौखट पर संघर्ष करने वाली पीड़िता के लिए शुक्रवार का दिन राहत और खुशी लेकर आया। अदालत द्वारा तत्कालीन एसएचओ बृजमोहन यादव और एसएसआई वेगपाल सिंह को दोषी ठहराते हुए दोनों को 20-20 साल की सजा और एक-एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किए जाने के बाद पीड़िता ने कहा कि आखिरकार उसकी लंबी लड़ाई रंग लाई है।
पीड़िता ने कहा कि पूरे संघर्ष के दौरान उसने और परिवार ने तरह-तरह की मुश्किलें सहीं लेकिन उसकी हिम्मत नहीं टूटी। उसने कहा कि आज का दिन उसके लिए बड़ा सुकून भरा दिन है।
फैसले के बाद छलकी पीड़िता की पीड़ा, परिवार पर बनाया गया दबाव लेकिन नहीं टूटी हिम्मत
अदालत का फैसला आने के बाद पीड़िता ने कहा कि उसके साथ जो भयावह घटना घटित हुई, उसके बाद उसने जीवन में एक ही लक्ष्य निर्धारित कर लिया था कि जब तक आरोपितों को अपने साथ किए की सजा नहीं दिला देती, तब तक वह चैन से नहीं बैठेगी। उसने लंबी कानूनी लड़ाई। इस दौरान उसे और उसके परिवार को डराने-धमकाने की बेहद कोशिश की गईं। लेकिन वह पीछे नहीं हटी। उनका कहना है कि न्याय पाने का रास्ता आसान नहीं था, लेकिन उन्हें भरोसा था कि एक दिन अदालत में सच्चाई सामने आएगी।
11 साल का सफर बेहद मुश्किल था
पीड़िता ने कहा कि 11 साल का यह सफर बेहद मुश्किल था। कई बार ऐसा लगा कि परिस्थितियां उनके खिलाफ खड़ी हैं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। हर पेशी और हर कानूनी प्रक्रिया के साथ न्याय मिलने की उम्मीद बनी रही। बताया कि मुकदमे की लंबी सुनवाई के दौरान उसे व उसके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी गईं। एक समय ऐसा आया कि उन पर हालात इतने तंग कर दिए गए और उनका घर से निकलना तक कठिन हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने कानूनी लड़ाई जारी रखी और किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया।
गुरुवार को अदालत का फैसला आने के बाद पीड़िता के चेहरे पर वर्षों के संघर्ष के बाद मिली राहत साफ नजर आई। पीड़िता ने कहा कि आज का दिन उनके लिए खुशी लेकर आया है। 11 साल तक जिस इंसाफ का इंतजार था, अदालत के फैसले ने उस इंतजार को खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में उन्हें और उनके परिवार को बहुत कुछ सहना पड़ा, लेकिन आखिरकार उन्हें न्याय मिला।
संघर्ष की कहानी बनी मिसाल
इस मामले में पीडि़ता ने उस समय आवाज उठाई, जब आरोप पुलिसकर्मियों पर ही लगे थे। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद मुकदमा दर्ज हुआ, जांच हुई और सीबीसीआईडी की फाइनल रिपोर्ट के बावजूद उन्होंने अदालत में अपनी लड़ाई जारी रखी। लंबी सुनवाई और गवाहों के बयानों के बाद अदालत ने दोनों पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया और अब 20-20 साल की सजा सुनाई गई है। पीड़िता के लिए यह फैसला केवल अदालत का निर्णय नहीं है बल्कि 11 साल तक झेले गए दबाव, डर और संघर्ष के बाद मिली राहत की जिंदा कहानी है।
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