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आंत तक फाड़कर कर दिया था लहूलहान, सहारनपुर में आवारा कुत्तों ने ली मासूम की जान

By Deepak Prajapati Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sun, 01 Nov 2026 06:11 PM (IST)

सहारनपुर के नागल स्थित बेलड़ा जुनारदार गांव में आवारा कुत्तों के हमले से 11 वर्षीय प्रियांशु की मौत हो गई। ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)

(प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. सहारनपुर में आवारा कुत्तों ने 11 वर्षीय बालक को मार डाला।

  2. पोस्टमार्टम में आंत फटने को मौत का मुख्य कारण बताया।

जागरण संवाददाता, सहारनपुर। जिले में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। नागल के गांव बेलड़ा जुनारदार में कुत्तों के नोचने से 11 वर्षीय बालक प्रियांशु की मौत के बाद रविवार को उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। दो डाक्टरों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रियांशु के पूरे शरीर पर ही कुत्तों के काटने के निशान मिले हैं।

पेट कटाने के लिए कुत्तों ने उसकी आंत पर भी काटा, जो मौत का मुख्य कारण बनी। बड़े बेटे की मौत के बाद मां पूजा का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार बेटे को याद कर बदहवास हो रही है। मां पूजा का कहना है कि कई बार ग्राम पंचायत और ब्लाक में आवारा कुत्तों की शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर समय रहते कार्रवाई होती तो आज उनका लाल जिंदा होता।

रोजाना लोगों को काटकर घायल कर रहे कुत्ते
नागल : क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गांवों से लेकर कस्बों तक कुत्तों के झुंड लोगों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। आए दिन कुत्ते राहगीरों, बच्चों और बुजुर्गों पर हमला कर उन्हें घायल कर रहे हैं। कई बार कुत्तों के हमले इतने खतरनाक साबित हो रहे हैं कि लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है। बेलड़ा जुनारदार में 11 वर्षीय बालक को आवारा कुत्तों द्वारा नोच-नोचकर मार डालने की दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बाहर बने मुर्गी फार्मों को भी गांव से दूर बनाया जाए। नागल थाना क्षेत्र के गांव बेलड़ा जुनारदार में 11 वर्षीय बालक की कुत्तों के झुंड़ ने नोच-नोच कर हत्या कर दी। इस घटना से हर कोई हतप्रभ है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गलियों, रास्तों और खेतों के आसपास कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं।

सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों और शाम के समय घर लौटने वाले लोगों को सबसे ज्यादा खतरा बना रहता है। कई बार बाइक सवारों के पीछे कुत्ते दौड़ पड़ते हैं, जिससे दुर्घटना होने का भी अंदेशा रहता है। मृतक बालक के पिता रविंद्र व मां पूजा का कहना है कि गांव में चारों तरफ मुर्गा फार्म है। इन फार्म में जो भी मुर्गा मर जाता है उसको बाहर फेंक देते हैं। जिस कारण कुत्तें खूंखार हो रहे हैं। यहां से बड़े ही नहीं निकल पाते हैं तो बच्चों को निकलना पूरी तरह से असंभव है।

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