नकली सिक्कों के मामले में पुलिस कर रही मुनाफे की कड़ी और एजेंटों की भूमिका की जांच
सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने के मामले में पुलिस अब मुनाफे की पूरी कड़ी और एजेंटों की भूमिका की जांच ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, सहारनपुर। नकली सिक्के बनाने के मामले में जांच अब उनके निर्माण से आगे बढ़कर मुनाफे की पूरी कड़ी तक पहुंच गई है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली सिक्कों की बिक्री से हासिल रकम आखिर किस-किस तक पहुंची और इसमें मुख्य आरोपितों के साथ एजेंटों की क्या भूमिका थी। खासतौर पर एजेंटों को दिए जाने वाले कमीशन और भुगतान के तरीके की जानकारी जुटाई जा रही है।
नगर कोतवाली पुलिस व स्वाट टीम ने नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का 12 सितंबर को राजफाश किया था। गिरोह के सदस्यों से एक लाख 29 हजार रुपये के 20-20 के नकली सिक्के बने हुए बरामद हुए थे। वहीं साढ़े चार लाख रुपये के अधबने सिक्कें भी बरामद हुए थे।
इस प्रकरण में आरोपितों के कब्जे से मिले रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन जांच के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं। रजिस्टरों में दर्ज लेनदेन, सिक्कों की संख्या, सप्लाई और रकम से संबंधित प्रविष्टियों को खंगाला जा रहा है। वहीं मोबाइल फोन से काल डिटेल, संपर्क में रहे लोगों और लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस यह जोड़ने का प्रयास कर रही हैं कि कौन व्यक्ति किससे संपर्क में था और नकली सिक्कों की खेप किस माध्यम से आगे पहुंचाई जाती थी। नकली सिक्कों को बाजार तक पहुंचाने में एजेंटों की भूमिका सामने आने के बाद अब उनके कमीशन की व्यवस्था भी जांच के दायरे में है।
एजेंटों को प्रति खेप, सिक्कों की संख्या या बिक्री के आधार पर भुगतान किया जाता था या किसी अन्य तरीके से कमीशन तय था, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस भुगतान की रकम और उसके स्रोत का भी मिलान कर रही हैं।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि नकली सिक्कों की बिक्री से तैयार रकम का अंतिम लाभार्थी कौन था। क्या पूरी रकम मुख्य आरोपित तक पहुंचती थी या नेटवर्क में शामिल अलग-अलग लोगों के बीच उसका बंटवारा होता था, इसकी जांच की जा रही है।
