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बैंक की 'तिजोरी' में कैसे लगा करोड़ों के नकली नोटों का अंबार, सिस्टम पर बड़ा सवाल?

By Deepak Prajapati Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Mon, 31 Aug 2026 04:43 PM (IST)

पंजाब नेशनल बैंक की सहारनपुर शाखा की करेंसी चेस्ट में 7.40 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने से बैंकिंग सिस्टम ...और पढ़ें

सोफिया मार्केट सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में है करेंसी चेस्ट। जागरण

सोफिया मार्केट सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में है करेंसी चेस्ट। जागरण

HighLights

  1. सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में मिले 7.40 करोड़ के जाली नोट

  2. तीन प्रबंधकों से पूछताछ के बाद खुलेगा राज, अन्य करेंसी चेस्ट भी संदेह के घेरे में

जागरण संवाददाता, सहारनपुर। पीएनबी की सोफिया मार्केट स्थित शाखा की करेंसी चेस्ट में सात करोड़ 40 लाख रुपये के नकली नोट मिलने के मामले में बैकिंग सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बैंक उपभोक्ताओं का कहना है कि जब बैंक में ही उनका रुपया सुरक्षित नहीं है तो फिर वह किस पर विश्वास करें।

पहला सवाल तो यही है कि नकली नोटों की इतनी बड़ी खेप करेंसी चेस्ट के अंदर कैसे पहुंची? इसको लेकर बैंक कर्मियों की मिली भगत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इन सवालों के जवाब एक वरिष्ठ मंडल प्रबंधक व दो करेंसी चेस्ट प्रबंधकों से पूछताछ के बाद ही मिलेंगे। वहीं इतनी बड़ी संख्या में मिली नकली नोटों की खेप ने अन्य बैंकों की करेंसी चेस्ट को भी जांच के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

घंटाघर पर सोफिया मार्केट स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट में करीब सात करोड़ चालीस लाख रुपये के जाली नोट मिलने से बैंकिंग व्यवस्था की निगरानी और करेंसी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोटों का करेंसी चेस्ट तक पहुंचना सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये नोट बैंकिंग सिस्टम में कहां से आए और किस स्तर पर इनकी पहचान नहीं हो सकी।

मामले की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। जांच में करेंसी के स्रोत, उसके बैंक तक पहुंचने की प्रक्रिया और चेस्ट में रखे जाने के दौरान अपनाई गई जांच व्यवस्था को केंद्र में रखा जा रहा है। बैंक अधिकारियों की जांच के दौरान इस मामले में वरिष्ठ प्रबंधक रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील शर्मा और हरियाणा के यमुनानगर जिले के जगाधरी स्थित खेड़ा बाजार करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार के नाम सामने आए हैं। इन तीनों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।

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जांच एजेंसियों के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में जाली नोट किस माध्यम से करेंसी चेस्ट तक पहुंचे। क्या ये नोट किसी अन्य बैंक की करेंसी चेस्ट से आए थे, किसी शाखा के माध्यम से जमा हुए या फिर करेंसी के एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जाने के दौरान इसमें गड़बड़ी हुई। इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।

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तीन प्रबंधकों से पूछताछ के बाद यह पता लगाने की कोशिश होगी कि संबंधित करेंसी की गिनती, सत्यापन, मशीन से जांच और रिकार्डिंग की प्रक्रिया में कहीं चूक हुई थी या नहीं। जांच में करेंसी चेस्ट के रिकार्ड, कैश मूवमेंट, सील, बंडल और संबंधित दस्तावेज भी महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकते हैं।

यदि जाली नोट किसी दूसरी करेंसी चेस्ट या बैंकिंग चैनल के जरिए यहां पहुंचे हैं तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि वहां से और कितनी करेंसी आगे भेजी गई। आरबीआई के दिशा-निर्देशों के मुताबिक बैंक काउंटर के साथ-साथ करेंसी चेस्ट में आने वाली थोक नकदी की भी मशीनों से जांच की जानी चाहिए। नकली नोट मिलने पर उन्हें वापस नहीं किया जा सकता और निर्धारित प्रक्रिया के तहत जब्त कर रिकार्ड किया जाना होता है।

किस स्तर पर हुई चूक?

मामले में जांच का दायरा केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए कि नकली नोट कहां से आए। यह भी देखा जाना जरूरी है कि करोड़ों रुपये की करेंसी की जांच के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट कैसे बची रही। यदि मशीन से जांच हुई थी तो नोटों की पहचान क्यों नहीं हो सकी और यदि जांच प्रक्रिया में मानवीय स्तर पर चूक हुई तो उसकी जिम्मेदारी किसकी हैद फिलहाल जांच पूरी होने का इंतजार है।

पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जाली नोट करेंसी चेस्ट तक पहुंचने के पीछे लापरवाही थी, तकनीकी चूक थी या किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका।