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हराम रिज्क होने के भ्रम से भी गुरेज करें रोजेदार

देवबंद में पवित्र माह रमजान में हलाल रिज्क (खाना) का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। जिस तरह जहर शरीर के लिए खतरनाक होता है उसी तरह हराम रिज्क भी दीन के लिए खतरनाक है।

By JagranEdited By: Published: Tue, 20 Apr 2021 11:23 PM (IST)Updated: Tue, 20 Apr 2021 11:23 PM (IST)
हराम रिज्क होने के भ्रम से भी गुरेज करें रोजेदार
हराम रिज्क होने के भ्रम से भी गुरेज करें रोजेदार

सहारनपुर, जेएनएन। देवबंद में पवित्र माह रमजान में हलाल रिज्क (खाना) का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। जिस तरह जहर शरीर के लिए खतरनाक होता है, उसी तरह हराम रिज्क भी दीन के लिए खतरनाक है।

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फतवा आन मोबाइल सर्विस के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारूकी ने बताया कि अल्लाह के नजदीक कोई भी चीज इतनी बुरी नहीं जितना बुरा वह पेट है, जो हराम रिज्क से भर दिया गया हो। रोजे में हलाल भी कम ही खाया जाना चाहिए, क्योंकि कम खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। रोजे का असली मकसद भी यही है कि पेट खाली रहे। जिससे कि इंद्रियां वश में रहें और ख्वाहिशों से दूर रहा जा सके। कहा कि रोजा अफ्तार के समय रोजेदारों को जमकर दुआ मांगनी चाहिए। क्योंकि उस वक्त मांगी हुई दुआ को अल्लाह कबूल फरमाता है। हमें अपने परिवार व बच्चों के साथ इफ्तार से पहले दस्तरख्वान पर एकत्र हो जाना चाहिए।

सार्वजनिक स्थलों पर थूकने पर पांच सौ रुपये जुर्माना

सहारनपुर : जिला मजिस्ट्रेट अखिलेश सिंह ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों या घर के बाहर थूकने पर 500 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। मास्क, गमछा, रुमाल या दुपट्टा न पहनने पर प्रथम बार के लिए एक हजार रुपये जुर्माना तथा फिर 10 हजार रुपये जुर्माना वसूल किया जाएगा।

गाइडलाइन का पालन कर शाकंभरी मां के दर्शन को जा रहे श्रद्धालु

बेहट: कोरोना का खतरा व माता शाकंभरी में आस्था, इसी असमंजस के बीच सिद्धपीठ पर लगे चैत्र नवरात्र मेले में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंगलवार को इस मेले का प्रथम मुख्य पर्व दुर्गाष्टमी था, लेकिन पहले जैसी श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं थी। मंदिर के मुख्य द्वार पर कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन सैनिटाइजिग थर्मल स्क्रीनिग के साथ हो रहा था।

मेले के मुख्य पर्व दुर्गा अष्टमी और चतुर्दशी होते हैं। मंगलवार को दुर्गा अष्टमी थी, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम थी। ऐहतियातन आरएएफ व्यवस्था संभाले थी। दोपहर बाद पुलिस मेला परिक्षेत्र में पहुंच गई थी। मंदिर के मुख्य द्वार पर श्रद्धालुओं की थर्मल स्क्रीनिग व सैनिटाइजिग की जा रही थी। मास्क के बिना तो श्रद्धालु को प्रवेश था ही नहीं। मुख्य तौर पर श्रद्धालुओं के वाहनों को नागल माफी में ही रोक दिया जा रहा था, जहां से श्रद्धालु पैदल पहले बाबा भूरादेव और इसके बाद माता शाकंभरी के दर्शन करने पहुंच रहे थे। भूरादेव पर तो प्रसाद भी नहीं चढ़ रहा था और ना ही यहां प्रसाद की दुकाने खली थी।

मेले मे भीड़ ना के बराबर

कोरोना के कारण इस बार मेले में भीड़ ना के बराबर है। वैसे तो लोगों से अपील है कि वह घरों में रहकर ही भगवती की आराधना करें, लेकिन फिर कुछ श्रद्धालु मां के दर्शनों को आ रहे हैं।

घर में रहकर माता शाकंभरी, भीमा, भ्रामरी, एवं शताक्षी माताओं की संकल्प के साथ पूजा करें। यदि घर से बाहर निकले तो सरकारी गाइडलाइन का पालन करते हुए व्यवहार करें। श्री शंकराचार्य आश्रम में वह स्वयं इस महामारी से सब की रक्षा के लिए अनुष्ठान कर रहे हैं।

श्री महंत स्वामी सहजानंद महाराज, व्यवस्थापक श्री शंकराचार्य आश्रम।


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