सहारनपुर, जेएनएन। सहारनपुर के मंडलायुक्त एवी राजमौलि को सहारनपुर से हटाकर आयुक्त खाद्य एवं रसद बनाया गया है, जबकि सहारनपुर मंडल के नए कमिश्नर के रूप में लोकेश एम को भेजा गया है। वहीं सीडीओ के रूप में तैनात प्रणय सिंह का तबादला नगर आयुक्त वाराणसी के पद पर किया गया है।

कमिश्नर एवी राजमौलि ने करीब 8 माह पहले सहारनपुर में ज्वाइन किया था। इनके तबादले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। नगर निगम के स्मार्ट सिटी कार्यों में दखल के कारण निगम का कार्य प्रभावित हो रहा था, वहीं कई अन्य कारण उनके तबादले के बताए जा रहे हैं। वहीं नगर निगम सहारनपुर में नगर आयुक्त के साथ-साथ सहारनपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का भी काम देख रहे ज्ञानेंद्र सिंह से अब वीसी का चार्ज वापस ले लिया गया है। शासन ने गोरखपुर प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आशीष कुमार को सहारनपुर प्राधिकरण का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। इनके अलावा सहारनपुर में सीडीओ तैनात आइएएस प्रणय सिंह का तबादला वाराणसी में नगर आयुक्त के पद पर किया गया है। हालांकि इनके स्थान पर अभी किसी की तैनाती नहीं की गई है। माना जा रहा है कि दूसरी तबादला सूची जारी होने पर सहारनपुर को नया सीडीओ मिल जाएगा। वहीं पीसीएस अधिकारी भी तबादला सूची का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि अभी तक पीसीएस की तबादला सूची जारी नहीं हुई है। यू-डायस का डाटा फीडिग पूरा कराने के निर्देश

सहारनपुर : जिला विद्यालय निरीक्षक रविदत्त ने यू-डायस के अंतर्गत डाटा फीडिग न कराने वाले स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया है कि वे प्रत्येक दशा में 28 जुलाई तक काम पूरा कराना सुनिश्चित करें।

जिले के सभी माध्यमिक स्कूलों को यू-डायस का डाटा फीडिग का कार्य 20 जुलाई तक पूरा कराने के निर्देश दिए गए थे। यू-डायस पोर्टल में जिले 395 स्कूल प्रदर्शित हो रहे हैं, जबकि यहां के 397 स्कूलों में से केवल 375 द्वारा ही डाटा फीडिग का कार्य शुरू कराया गया। 23 स्कूलों में 13 स्कूल प्रोसेस में है जबकि 10 स्कूलों द्वारा डाटा फीडिग का काम शुरू ही नहीं कराया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक ने इन स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने विकासखंड के ब्लाक संसाधन केंद्र से यूजर आईडी और पासवर्ड लेकर यू-डायस प्लस का आनलाइन त्रुटिरहित फीडिग कराकर 28 जुलाई तक पूरा कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिए कि एक प्रमाणित प्रति उनके कार्यालय में भी जमा कराएं। निर्धारित समय में कार्य पूरा न करने पर संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य तथा लिपिक का वेतन रोकने की कार्यवाही की जायेगी तथा वित्तविहीन स्कूलों के मान्यता प्रत्याहरण की कार्यवाही को बाध्य होना पड़ेगा।

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