जिम्मेदारी मिलते ही बदले इमरान मसूद के सुर, सपा गठबंधन पर नरम पड़े तेवर, बोले- नहीं छोड़ी जाएगी कोई कसर
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस नई जिम्मेदारी के बाद ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और कांग्रेस ने प्रादेशिक संगठन में बदलाव करते हुए सांसद इमरान मसूद को अहम जिम्मेदारी दी है। कभी सपा से गठबंधन के बावजूद जिले की सातों सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार उतारने का ऐलान करने वाले सांसद इमरान मसूद के सुर कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलते ही बदलने लगे हैं।
सपा संग गठबंधन के भविष्य के सवाल से किनारा करते हुए अब इसे वह आने वाले वक्त के हवाले छोड़ते दिख रहे हैं। हालांकि गठबंधन में कांग्रेस की सम्मानजनक और मजबूत स्थिति की पैरोकारी पर वह अभी भी अडिग हैं।
प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद सांसद इमरान मसूद से शीर्ष नेतृत्व का आभार जताते हुए दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि पार्टी आलाकमान ने जो भरोसा जताया है, वह उस पर खरा उतरने का पूरी निष्ठा से प्रयास करेंगे। उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने में कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
अजय राय की सराहना
इमरान ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष अजय राय के कार्यकाल की सराहना की। कहा कि अजय राय ने पार्टी के लिए काफी संघर्ष किया है। मजबूती के साथ कांग्रेस की लड़ाई लड़ी। पार्टी के लिए उनके संघर्ष को नकारा नहीं जा सकता।
कांग्रेस में संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व का होता है और सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं को संगठन हित में नेतृत्व के फैसलों के अनुरूप काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य कांग्रेस को मजबूत कर शीर्ष नेतृत्व अपेक्षाओं के अनुरूप काम करना है।
सपा के सवाल से किनारा
सपा से गठबंधन के भविष्य और उत्तर प्रदेश में कितनी सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी? के सवाल से किनारा करते हुए कार्यकारी अध्यक्ष व सांसद इमरान मसूद ने सिर्फ इतना कहा कि यह आने वाला वक्त बताएगा। यहां गौर करने वाली बात यह है कि सांसद इमरान मसूद गाहे-बगाहे सपा से गठबंधन में कांग्रेस की हिस्सेदारी को लेकर मुखर रहे हैं।
जहां सहारनपुर देहात के विधायक आशु मलिक और कैराना सांसद इकरा हसन के साथ उनकी जुबानी जंग जगजाहिर है, वहीं वह सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुस्लिम राजनीति पर भी सवाल खड़े कर चुके हैं। यहां तक कि पिछले दिनों वह बेहट विधानसभा, जो कि सपा के पास है, पर भी कांग्रेस की दावेदारी कर चुके हैं।
ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा और कांग्रेस के गठबंधन का भविष्य क्या रुख अपनाता है? सांसद इमरान मसूद अपने पहले दिए बयानों के तिलिस्म में घिरे रहेंगे या कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के तेवर गठबंधन की खातिर नरम पड़ेंगे?
