अजय राय की जगह आराधना मिश्रा, मरान मसूद कार्यकारी अध्यक्ष... यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस ने क्यों चला दांव?
कांग्रेस हाईकमान ने उत्तरप्रदेश चुनाव से पहले अजय राय को हटाकर आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है

राजनीतिक-सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के तहत अजय राय को हटाकर आराधना मिश्रा मोना को कमान

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संजय मिश्र, नई दिल्ली। कांग्रेस हाईकमान ने उत्तरप्रदेश चुनाव में पार्टी का राजनीतिक-सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के तहत अजय राय को हटाकर आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष बना दिया है।
चुनाव से ठीक पहले अजय राय को हटाकर आराधना को प्रदेश संगठन की कमान सौंपने के फैसले से साफ है कि कांग्रेस 2027 के उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में उच्च वर्ग विशेषकर ब्राहृमण समुदाय को साथ लाने का दांव चल रही है।
इमरान बने कार्यकारी अध्यक्ष
इसी रणनीति के तहत पार्टी ने अल्पसंख्यक समुदाय को भी संदेश देने के लिए मुखर लोकसभा सांसद इमरान मसूद को प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। वहीं अति पिछड़े वर्ग के देविंदर निषाद तथा आलोक प्रसाद को प्रदेश कांग्रेस का वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
कांग्रेस ने इन नियुक्तियों के साथ ही समाजवादी पार्टी से चुनावी गठबंधन और सीटों के बंटवारे की रफ्तार देने की शुरूआत कर दी है। सपा से सीटों के तालमेल की पहल के मद्देनजर कांग्रेस ने उत्तरप्रदेश में अपने इस अहम संगठनात्मक बदलाव को मूर्त रूप दे दिया।
ब्राह्मण वर्ग को साधने की कोशिश
कांग्रेस नेतृत्व ने अपने स्तर पर कराए राजनीति आकलन और सर्वेक्षणों के आधार पर संगठन में यह फेरबदल किया है। पार्टी का आकलन है कि उत्तरप्रदेश में प्रभावशाली उच्चवर्ग विशेषकर ब्राहृमण समुदाय इस समय भाजपा से नाराज है और विकल्प तलाश रहा है। श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर भी भाजपा-संघ के प्रति जमीनी नाराजगी का कांग्रेस का अपना आकलन है।
ऐसे में पार्टी को उम्मीद है कि तीन दशक बाद फिर से ब्राहृमण समुदाय को कांग्रेस के साथ लाने का अगले चुनाव में एक बड़ा मौका है। इसलिए आराधना मिश्रा पर दांव लगाया गया है और उनके महिला होने का भी पार्टी को फायदा मिलने की उम्मीद है। मोना के जहां सपा से बेहतर रिश्ते हैं वहीं इमरान मसूद और सपा नेतृत्व के बीच काफी समय से तल्खी चल रही है।
राहुल से हुई थी चर्चा
साफ है कि कांग्रेस ने गठबंधन की राजनीति के मद्देनजर नरम और गरम दोनों का संतुलन संगठन में रखने की रणनीति अपनायी है। उत्तरप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रदेश संगठन में इस बदलावों को लेकर सोमवार को ही लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी से चर्चा कर ली थी।
प्रदेश की चुनावी टीम और जिला स्तर की संगठनात्मक नियुक्तियों की घोषणा भी जल्द किए जाने के संकेत हैं। वैसे निर्वतमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के काम या नेतृत्व पर कोई सवाल नहीं था मगर चुनावी दांव साधने का बड़ा संदेश देने के लिए मोना को नेतृत्व का चेहरा बनाया गया है।
सपा को संदेश देने की कोशिश
आराधना ही नहीं उनके पिता राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी के भी सपा से बेहतर रिश्ते रहे हैं। संगठनात्मक बदलाव की रूपरेखा तय करने से पहले ही कांग्रेस ने सपा से गठबंधन को अंतिम रूप देने की गति तेज करने का संदेश दे दिया था। पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अखिलेश यादव से चुनावी तैयारियों में कोई कोताही न रहे इसलिए अक्टूबर में सीट बंटवारा समझौता कर लेने का संदेश दिया जा चुका है।
प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की 150 सीटों पर दावेदारी के संबंध में कहा कि प्रदेश नेताओं का अपना आकलन होता है मगर जमीनी आधार पर आपसी बातचीत से सम्माजनक संख्या पर सहमति बन जाएगी। कांग्रेस ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से अक्टूबर महीने में ही सीट बंटवारे के समझौते को पूरा कर लेने के लिए कहा है।
गठबंधन होगा या नहीं?
उत्तरप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम भी सपा-कांग्रेस के बीच समझौते को लेकर आश्वस्त हैं और दोनों दलों के प्रदेश नेताओं की ओर किए जा रहे दावों के संबंध में पूछे जाने पर कहा कि हर पार्टी का अपना नजरिया होता है। लेकिन इसमें संदेह नहीं कि राहुल गांधी तथा अखिलेश यादव के बीच उत्तरप्रदेश में मिलकर चुनाव लड़ने की पूर्ण सहमति है और ऐसे में सीट बंटवारा समझौता सम्मानजक होगा।
कांग्रेस अपने कुछ नेताओं को समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर तल्ख टीका-टिप्पणी करने से परहेज करने का निर्देश देते हुए साफ कर दिया है कि विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस का गठबंधन तय है।
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