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फैक्ट्रियों के कचरे ने बदला हरनंदी का रंग... 120 फीट की गहराई तक पानी पीने लायक नहीं, बढ़ रहा कैंसर का खतरा

Published: Sun, 01 Mar 2026 12:49 AM (GMT+05:30)

सहारनपुर में हरनंदी (हिंडन/कृष्णा) नदी के प्रदूषण से गांवों में गंभीर स्वास्थ्य संकट गहरा गया है। औद्योगिक कचरे के कारण ...और पढ़ें

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मनीष जसवंत, जागरण सहारनपुर। गांवों की गलियों में खांसते बच्चे-बुजुर्ग, पीले पड़ते चेहरे और अस्पताल की दहलीज पर बैठी टूटी निगाहें, ये सब हरनंदी की कहानी के नए अध्याय हैं। लोग कहते हैं कि अब पेट में सामान्य दर्द भी होता है तो कैंसर का डर सताता है।

जीवनदायिनी हरनंदी अब अभिशप्त हो चुकी है। वह बहती नहीं, बल्कि हर दिन जहर बन शरीरों में उतर रही है। शिवालिक की पहाड़ियों से निकली निर्मल हरनंदी 75 किलोमीटर के सफर तय कर बड़गांव क्षेत्र में पहुंचते ही जहरीली हो जाती है। गागलहेड़ी क्षेत्र से नागल तक कई फैक्ट्रियों से दूषित पानी हिंडन नदी में छोड़ा जा रहा है। नदी किनारे बसे गांवों में हैंडपंपों का पानी भी दूषित और पीला निकलता है, जो पीने योग्य नहीं है।

बड़गांव क्षेत्र के शब्बीरपुर के शोभाराम, शिमलाना के नरेश कैंसर से जूझ रहे हैं। महेशपुर के वीरेंद्र को गले और अशोक को फेफड़े का कैंसर है। इसी गांव के सोमपाल, ब्रजपाल, इंद्रजीत, राजकुमार, मांगा और धर्मपाल सोरायसिस की चपेट में है। शिमलाना का रविप्रकाश दो साल से लिवर और पेट की समस्या से जूझ रहे हैं।

नन्हेड़ा खुर्द के रामशरण सिंह दस साल से पेट की बीमारी से ग्रसित हैं। यह फेहरिस्त बहुत लंबी है और दिनों-दिन इसमें नाम बढ़ रहे हैं। हरनंदी के प्रदूषण का असर इतना घातक हुआ कि किनारे बसे गांवों का 120 फीट गहराई तक पानी पीने योग्य नहीं रहा। किनारे के बीस से अधिक गांवों के 350 से अधिक लोग विभिन्न बीमारियों की चपेट आकर मौत के मुंह में समा चुके हैं।

सहारनपुर के ये गांवों में प्रदूषित, गंभीर बिमारियों की चपेट में ग्रामीण

बडगांव क्षेत्र में हिंडन किनारे बसे गांव अंबेहटा चांद, भगवानपुर, टपरी, सांवतखेडी, शब्बीरपुर, नूनाबडी, बेलडा, महेशपुर, शिमलाना, चिराऊं, रतनहेडी, नन्हेडा खुर्द , पीपलो व बडाबांस आदि गांवों में नलों का पानी पीने लायक नही रहा है। यहां कैंसर, पीलिया जैसी जानलेवा बीमारियों ने इन गांवों में दो सौ से भी अधिक मौत हो चुकी हैं।

गागलहेड़ी क्षेत्र में हरोडा अहतमाल व हरोडा मुस्तहकम में पिछले दस वर्षों में कैंसर से मरने वालों की संख्या 50 से अधिक हो चुकी है। मक्काबांस में भी तीन ग्रामीणों की कैंसर से मौत हो चुकी है, जबकि एक कैंसर मरीज उपचाराधीन है। गागलहेड़ी में भी कैंसर के सात एक्टिव मरीज हैं।

ननौता से होकर गुजर रही कृष्णा नदी के प्रदूषित पानी से गांव भनेड़ा खेमचंद की लगभग 3500 की आबादी प्रभावित है। ग्रामीणों के अनुसार, पांच वर्षों में यहां दो दर्जन से अधिक लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में ग्रामीण चर्म रोग, एलर्जी व गुर्दा रोग सहित विभिन्न गंभीर रोगों की चपेट में हैं।

सहारनपुर देहात विधायक ने उठाया था मुद्दा

सहारनपुर देहात विधायक आशु मलिक ने प्रदूषित जल के चलते कैंसर से जा रही जानों का मसला विधानसभा में प्रमुखता से उठाया। इसके बाद शासन ने सैंपल लेने को टीम गठित की, जिसकी रिपोर्ट में नतीजे बेहद गंभीर आए। उधर, करीब छह वर्ष पूर्व लाल निशान लगाकर हिंडन किनारे बसे कई गांवों से सैकड़ों हैंडपंप उखड़वाए गए, लेकिन दूषित हो चुके भूजल की रोकथाम की ठोस पहल नहीं हो सकी।

बाबा मंगल गिरी कर चुके अनशन, हर बार मिला आश्वासन

प्रदूषित हो चुकी हिंडन, कृष्णा व काली नदी को जीवित करने के लिए बाबा मंगल गिरी एक दशक से ज्यादा समय से आंदोलन कर रहे हैं। हर बार आश्वासन मिला, लेकिन कोई सकारात्मक पहल नहीं हो सकी। बाबा लक्कडनाथ की समाधि पर हवन कर बाबा मंगल गिरी पिछले माह फिर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।

आठवें दिन इस बार भी आश्वासन मिला। इससे पहले वर्ष 2012 में शिमलाना के शिव मंदिर में आंदोलन किया तो नौवें तत्कालीन मंत्री राजेंद्र सिंह राणा ने, 2014 में भगवानपुर के मंदिर में बारहवें दिन तत्कालीन एडीएम दिनेश चंद्रा ने और 2018 में महेशपुर के शिव मंदिर में मौजूद लोनिवि राज्यमंत्री कुंवर बृजेश सिंह ने आश्वासन देकर भूख हड़ताल को समाप्त कराया था।

बाबा मंगल गिरी का कहना है कि हरनंदी सहित किसी भी नदी को प्रदूषणमुक्त करने की शुरुआत नहीं की गई। हिंडन व उसकी सहायक नदियों को प्रदूषणमुक्त करने को वह दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे।