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मां शाकंभरी के दर्शनों को उमड़ रहे श्रद्धालु

खराब मौसम और नदी में बार बार पानी आने के कारण प्रशासन द्वारा एक अगस्त तक सिद्ध पीठ श्री शाकंभरी देवी पर लगे शारदीय नवरात्र मेले को स्थगित कर देने के बावजूद श्रद्धालुओं का सिद्ध पीठ पर पहुंचना थम नहीं रहा है। हालांकि मेले की तुलना में भीड़ बहुत कम हैं लेकिन अच्छी खासी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन को पहुंच रहे हैं।

By JagranEdited By: Published: Mon, 30 Sep 2019 10:52 PM (IST)Updated: Mon, 30 Sep 2019 10:52 PM (IST)
मां शाकंभरी के दर्शनों को उमड़ रहे श्रद्धालु

सहारनपुर जेएनएन। खराब मौसम और नदी में बार-बार पानी आने के कारण प्रशासन द्वारा एक अगस्त तक सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी पर लगे शारदीय नवरात्र मेले को स्थगित कर देने के बावजूद श्रद्धालुओं का सिद्धपीठ पर पहुंचना थम नहीं रहा है। हालांकि मेले की तुलना में भीड़ बहुत कम है, लेकिन अच्छी खासी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन को पहुंच रहे हैं। वहीं कृषि सूर्यप्रताप शाही ने भी रविवार की देर शाम माता शाकंभरी के दर्शन किये। इस मौके पर उन्हें पीड़ित दुकानदारों ने मिलकर उनका दर्द सुना।

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शुक्रवार की रात आई बाढ़ ने प्रथम नवरात्र से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र मेले की तमाम व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर दिया था। बाढ़ में एक दुकानदार की मौत हो गई थी, वहीं दो गंभीर घायल हो गए थे। इसके बाद प्रशासन ने मेले की तमाम व्यवस्थाएं अपने हाथ में ले ली थी। एसडीएम व सीओ ही नहीं एसपी देहात तक भी मौके पर रहकर तमाम व्यवस्थाओं को संचालित करते रहे हैं। रविवार की शाम प्रशासन ने मेले को एक अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया था, क्योंकि रविवार को प्रथम नवरात्र से मेला शुरू हो गया था, लेकिन नदी में फिर पानी आ जाने के कारण श्रद्धालु खतरों से खेलते हुए माता के दरबार तक पहुंच रहे थे। हालांकि पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी लगातार इन श्रद्धालुओं की मदद करते रहे। मेले को स्थगित कर देने के आदेश के बावजूद माता के भक्तों का सिद्ध पीठ पर पहुंचना थमा नहीं है यह बात अलग है, कि संख्या मेले की तुलना में काफी कम हो गई है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं के वाहनों को तो मुख्य मंदिर से 2 किलोमीटर पहले ही नागल माफी में रोक दिया है। यहां से श्रद्धालु पैदल अथवा 10 रूपये प्रति श्रद्धालु ई रिक्शा में किराया देकर भूरादेव तक पहुंच रहे हैं, जबकि भूरा देव से माता के मंदिर तक एक किलोमीटर की नदी के रास्ते में स्थानीय लोगों ने ट्रैक्टर ट्राली चला रखी है।


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