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थाना प्रभारी और SI गैंग रेप के मामले में दोषी करार, सहारनपुर की कोर्ट ने सुनाया फैसला

By Praveen Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 05 Nov 2026 05:39 PM (IST)

Saharanpur News: देवबंद के बहुचर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में दो पुलिसकर्मी दोषी करार दिए गए हैं। अदालत ने तत्कालीन थाना ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो

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HighLights

  1. तत्कालीन थाना प्रभारी बृजमोहन यादव और उपनिरीक्षक वेगपाल सिंह दोषी।

  2. पुलिस से न्याय नहीं मिलने पर पीड़िता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

संवाद सहयोगी, सहारनपुर। देवबंद के बहुचर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में करीब 11 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार पीड़िता को न्याय की दिशा में बड़ी सफलता मिली है।

त्वरित न्यायालय कक्ष संख्या-दो के अपर सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार वर्मा ने वर्ष 2015 के सामूहिक दुष्कर्म मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी बृजमोहन यादव और उपनिरीक्षक वेगपाल सिंह को दोषी करार दिया है। अदालत शुक्रवार छह नवंबर को सजा के प्रश्न पर सुनवाई करेगी। फैसले के बाद दोनों दोषियों को अदालत से ही हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।

अधिवक्ता राजीव तोमर के अनुसार, अपर सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार वर्मा की अदालत ने मामले में दोनों पुलिसकर्मियों को दोषी माना है। अदालत के इस फैसले को लंबे समय से न्याय की लड़ाई लड़ रही पीड़िता के लिए अहम माना जा रहा है। खास बात यह है कि मामले में पहले पुलिस स्तर पर सुनवाई नहीं हुई और सीबीसीआइडी ने भी विवेचना के बाद अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इसके बावजूद पीड़िता ने हार नहीं मानी और अदालत में कानूनी लड़ाई जारी रखी।

यह था मामला

छह अगस्त 2015 को देवबंद पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि इसके बाद उसकी पत्नी और बहन जब थाने पहुंचीं तो वहां मौजूद एक दारोगा ने उन्हें थाना प्रभारी से मिलने के लिए कहा। पीड़िता का आरोप था कि थाने में मौजूद चार पुलिसकर्मियों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना की शिकायत पुलिस अधिकारियों से की गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। तत्कालीन एसएसपी स्तर से भी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई।

हाई कोर्ट के निर्देश पर दर्ज हुआ था मुकदमा

पुलिस से न्याय नहीं मिलने पर पीड़िता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वर्ष 2017 में धारा 156(3) के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद मामले की विवेचना सीबीसीआइडी को सौंपी गई। सीबीसीआइडी ने जांच के बाद आरोपों को गलत बताते हुए अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी। हालांकि, पीड़िता ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करने से इंकार करते हुए अदालत में चुनौती दी।

उसकी आपत्ति के बाद आरोपितों को अदालत में तलब किया गया और मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। करीब नौ साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद गुरुवार को अदालत ने तत्कालीन थाना प्रभारी बृजमोहन यादव और उपनिरीक्षक वेगपाल सिंह को दोषी करार दे दिया। आज अदालत दोनों की सजा पर फैसला सुनाएगी।

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