'गिराई गई मस्जिदें फिर होंगी आबाद, जो आज सत्ता में है वो कल नहीं रहेंगे', मौलाना अरशद मदनी का सरकार पर हमला
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि गिराई गई मस्जिदें फिर आबाद होंगी और मौजूदा सत्ताधारी हमेशा नहीं रहेंगे। उन्होंने मुसलमानों ...और पढ़ें

मौलाना अरशद मदनी।
HighLights
मस्जिदें फिर आबाद होंगी, मौजूदा सत्ताधारी हमेशा नहीं रहेंगे।
इस्लाम और उसकी धार्मिक पहचान को निशाना बनाया जा रहा।
मदरसों की शैक्षिक व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज सुधारने पर जोर।
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। दारुल उलूम के सदर मुदर्रिस एवं जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि आज मस्जिदों को शहीद किया जा रहा है, लेकिन वह फिर आबाद होंगी। जो लोग आज सत्ता में हैं, वे कल नहीं रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारें मुसलमानों को निशाना बनाती थीं, जबकि मौजूदा सरकार के दौर में इस्लाम और उसकी धार्मिक पहचान को भी निशाना बनाया जा रहा है।
दारुल उलूम की मस्जिद रशीद में मंगलवार को कुल हिंद राब्ता-ए-मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया के सम्मेलन में देशभर से आए उलमा और मदरसों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए अरशद मदनी ने सोवियत संघ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लंबे समय तक धर्म और धार्मिक प्रतीकों को दबाने की कोशिश हुई, लेकिन लोगों के दिलों से ईमान नहीं मिटाया जा सका।
आखिरकार सोवियत संघ बिखर गया और उससे स्वतंत्र हुए कई देशों में आज मस्जिदें आबाद हैं और वहां अजान की आवाज गूंज रही है। मदनी ने कहा कि दारुल उलूम समेत मदरसों की ऐतिहासिक भूमिका को विकृत करने और उनकी छवि खराब करने की कोशिशें अफसोसनाक है। मुसलमानों को मौजूदा परिस्थितियों में निराश होने के बजाय सब्र और एकजुटता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
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मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि मदरसों की शैक्षिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ उनके प्रशासनिक कामकाज को भी व्यवस्थित करना जरूरी है। संस्थानों को अपने अभिलेख दुरुस्त रखने, सरकारी नियमों का पालन करने और शैक्षिक गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर ध्यान देना चाहिए। विद्यार्थियों की बेहतर संस्कार और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
