रामपुर : आर्य समाज की ओर से ज्वालानगर में तीन दिवसीय 21वें वेद महोत्सव का आयोजन धूमधाम से प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर वेदाचार्य ओमव्रत द्वारा वैदिक यज्ञ किया गया। इसमें उपस्थित जन ने विश्व कल्याण की भावना के साथ आहुतियां दीं। इस दौरान उन्होंने यज्ञ के महत्व की विस्तृत जानकारी दी। कहा कि हम सब अपनी इंद्रियों से गंदगी पैदा करते हैं। उसे शुद्ध करने का कार्य भी हमारा ही है। अशुद्धि को शुद्ध करने का मुख्य उपाय एकमात्र यज्ञ ही है। आजकल यज्ञ न होने के कारण पर्यावरण अशुद्ध हो रहा है। इसके साथ ही बीमारियां भी बढ़ रही हैं। इनको दूर करने के लिए यज्ञ करना चाहिए।

उन्होंने बीमारियों से बचने के लिए गाय पालने की भी सलाह दी। भजनापदेशक सुखपाल आर्य ने कहा कि मानव यदि यज्ञ से जुड़ा रहेगा तो परमात्मा से उसका सीधा संबंध बना रहेगा। भजनोपदेशक सीता आर्य ने कहा कि परमपिता निराकार हैं। वह चीनी में मिठास, नींबू में खटास और नीम में कड़वाहट के समान हैं। उन्हें आंखों से नहीं देखा जा सकता। यज्ञ ही उन तक पहुंचने का उचित साधन है।

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