यूपी के स्कूलों में अब रील और शार्ट्स के अंदाज में होगी पढ़ाई, Gen-Z और Gen-Alpha के लिए बदला स्टडी ट्रेंड
परिषदीय स्कूलों में जेन जी और जेन अल्फा के लिए पढ़ाई का तरीका बदलेगा, जिसमें कठिन अध्यायों को शार्ट्स और रील्स के जरिए आसान बनाया जाएगा।

अब शार्ट्स-रील्स के अंदाज में होगी जेन जी और जेन अल्फा की पढ़ाई।
HighLights
कठिन अध्याय शार्ट्स और रील्स से समझाए जाएंगे।
SIET कक्षा 1-12 के लिए डिजिटल सामग्री बनाएगा।
स्मार्ट क्लास में वीडियो से पुनरावृत्ति आसान होगी।
राधेश्याम, रामपुर। जेन जी और जेन अल्फा की बदलती सीखने की शैली के साथ परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई का अंदाज भी बदलने की तैयारी है। परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए कठिन अध्याय और जटिल अवधारणाओं को शार्ट्स, रील्स और छोटे वीडियो के जरिये आसान बनाया जाएगा।
राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान कक्षा एक से 12 तक विषयवार डिजिटल कंटेंट तैयार करेगा। स्मार्ट क्लास इस पहल का स्थानीय आधार बनेंगी, जहां शिक्षक कठिन टापिक समझाने के साथ वीडियो के जरिये विद्यार्थियों को उसी पाठ की पुनरावृत्ति भी करा सकेंगे।
डिजिटल सामग्री के इस्तेमाल से शिक्षक किसी कठिन अवधारणा को केवल बोर्ड या किताब से समझाने के बजाय संबंधित शार्ट वीडियो, एनीमेशन और उदाहरण के जरिये उसे दृश्य रूप में समझा सकेंगे। कक्षा में समझ न आने पर विद्यार्थी उसी सामग्री को दोबारा देखकर टॉपिक की पुनरावृत्ति कर सकेंगे।
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से डिजिटल शैक्षिक सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। डिजीटल शिक्षण सामग्री को छोटे और आकर्षक फार्मेट में विस्तार दिया जा रहा है।
बीएसए कल्पना देवी ने बताया कि एसआइईटी की ओर से शिक्षकों के वीडियो तैयार कर डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब विषयवार शार्ट्स और रील्स तैयार किए जाएंगे। एसआइईटी अपना यू-ट्यूब चैनल और फेसबुक पेज शुरू करने की तैयारी में है।
बच्चों के साथ शिक्षकों का भी बदलेगा रोल
वीडियो में एक कठिन अवधारणा या टापिक पर फोकस रहेगा। सरल भाषा, उदाहरण और एनीमेशन के जरिये विषय समझाया जाएगा। विद्यार्थियों की शंकाओं और जिज्ञासाओं को ध्यान में रखकर सामग्री तैयार होगी। शिक्षकों से भी कठिन विषयों पर शार्ट्स और रील्स तैयार कीजा रही है।
इससे शिक्षक केवल डिजिटल वीडियो दिखाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कक्षा की जरूरत के अनुसार सामग्री चुनकर समझाने, पुनरावृत्ति कराने और विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया लेने में इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
स्मार्ट क्लास का संभावित असर
- कठिन अवधारणाओं को वीडियो और एनीमेशन के माध्यम से दृश्य रूप में समझाने का अवसर।
- कक्षा में पढ़ाए गए टॉपिक की तुरंत पुनरावृत्ति कराई जा सकेगी।
- विद्यार्थियों को समझ में न आए विषय को दोबारा देखने का विकल्प मिलेगा।
- शिक्षक एक ही अवधारणा को किताब, बोर्ड और डिजिटल वीडियो जैसे अलग माध्यमों से समझा सकेंगे।
- विषयवार डिजिटल सामग्री उपलब्ध होने से कक्षा की जरूरत के अनुसार कंटेंट चुनना आसान होगा।
- कमजोर विद्यार्थियों को कठिन टापिक पर अतिरिक्त अभ्यास और दोहराव का अवसर मिल सकेगा।
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