सनातन विवाद: उदयनिधि-खड़गे मामले में कोर्ट पहुंचे स्वार थाना प्रभारी, ट्रांसफर विवेचना पर जताई कड़ी आपत्ति
रामपुर कोर्ट में उदयनिधि स्टालिन और प्रियांक खड़गे के सनातन धर्म पर विवादित बयान मामले की सुनवाई हुई। स्वार थाना ...और पढ़ें

उदयनिधि स्टालिन और प्रियांक खड़गे
जागरण संवाददाता, रामपुर। सनातन धर्म पर विवादित बयान देने के मामले में आरोपित तमिलनाडु के पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन और कर्नाटक सरकार में गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के मुकदमे की सोमवार को सुनवाई हुई। इसमें न्यायालय ने विवेचक समेत अन्य पुलिस अधिकारियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था।
अपने नोटिस का जवाब देने स्वार कोतवाली प्रभारी अनुपम शर्मा न्यायालय पहुंचे और नोटिस पर आपत्ति जताई। वह पहले क्राइम ब्रांच में निरीक्षक थे और उनके द्वारा विवेचना की गई थी। अब इस मामले में 22 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
शहर के दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं राम सिंह लोधी और हर्ष गुप्ता ने तीन साल पहले पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। दोनों अधिवक्ताओं का कहना था कि चार सितंबर 2023 को उदयनिधि स्टालिन का भाषण अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ।
इसमें उन्होंने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया व कोरोना से करते हुए कहा कि जिस प्रकार इन बीमारियों का नाश किया जा रहा है, उसी प्रकार सनातन धर्म का भी नाश आवश्यक है।
अगले दिन एक हिंदी राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रियांक खरगे द्वारा स्टालिन के भाषण का समर्थन करते हुए समाचार प्रकाशित हुआ। इस तरह का समाचार पढ़कर हमारी भावनाओं को अत्याधिक आघात पहुंचा है।
स्टालिन द्वारा धर्म आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता व समप्रवर्तन और सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कृत्य किया गया है। यह जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किया गया है।
अधिवक्ताओं की शिकायत पर दोनों मंत्रियों के खिलाफ पांच सितंबर 2023 को सिविल लाइंस कोतवाली में धारा 153 ए व 295 ए आइपीसी के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इस मुकदमे की जांच न्यायालय की निगरानी में की जा रही थी। बावजूद इसके पुलिस अधिकारियों ने विवेचना संबंधित राज्यों के मुख्यालयों को स्थानांतरित कर दी गई।
इसकी जानकारी शिकायतकर्ताओं को नहीं दी गई। शिकायतकर्ताओं ने एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) में प्रार्थना पत्र देकर इस पर सवाल उठाए। न्यायालय ने इस पर सुनवाई करते हुए सभी जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस भेजा था।
पूर्व एसपी विद्यासागर मिश्र को नहीं मिला नोटिस
अधिवक्ताओं के प्रार्थना पत्र पर न्यायालय ने एडीजी बरेली, डीआइजी मुरादाबाद, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और विवेचना अधिकारी को नोटिस भेजे थे। तब यहां विद्यासागर मिश्र पुलिस अधीक्षक थे।
वह अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अधिवक्ता हर्ष गुप्ता ने बताया कि उन्हें कोर्ट का नोटिस तामील नहीं हो सका है। रजिस्ट्री वापस आ गई है। बाकी अधिकारियों को नोटिस मिल गए हैं।
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