Janmashtami 2026: 4 सितंबर को बन रहा विशेष योग, रात 11:57 से शुरू होगी 45 मिनट की खास पूजा
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा, क्योंकि मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि विद्यमान रहेगी। इस दिन रात 11:57 ...और पढ़ें

कृष्ण जन्माष्टमी
HighLights
अष्टमी तिथि दो दिन होने से असमंजस, रात 11:57 से 12:43 बजे तक होगी विशेष पूजा
संवाद सहयोगी, रामपुर। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाने वाला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व इस बार चार सितंबर को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि विद्यमान होने के कारण चार सितंबर को जन्माष्टमी का व्रत रखना शुभ रहेगा। इसी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि चार सितंबर को रात 2:25 बजे शुरू होकर पांच सितंबर की रात 12:13 बजे समाप्त होगी। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मध्यरात्रि में मनाने की परंपरा है।
ऐसे में चार सितंबर को व्रत रखकर निशीथ काल में विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। मंदिरों और घरों में बाल गोपाल का विशेष शृंगार कर झांकियां सजाई जाएंगी। भगवान के जन्म के समय शंखनाद, घंटा-घड़ियाल और आरती के साथ उत्सव मनाया जाएगा
श्रीनाथ ज्योतिष केंद्र केे ज्योतिषाचार्य पंडित नवनीत शर्मा ने बताया कि जन्माष्टमी के व्रत में अष्टमी तिथि के साथ मध्यरात्रि का विशेष महत्व होता है। इस बार चार सितंबर की रात जन्मोत्सव के समय अष्टमी तिथि विद्यमान रहेगी। इसलिए इसी दिन व्रत रखना शास्त्रसम्मत है।
श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का पूजन कर सकते हैं। बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाकर आरती करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित संजय शर्मा के अनुसार अष्टमी तिथि चार सितंबर की रात से शुरू होकर पांच सितंबर की रात तक रहेगी। जन्माष्टमी के लिए मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि का होना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए पर्व चार सितंबर को ही मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि पूजन में पंचामृत, तुलसी दल, पीले पुष्प, माखन-मिश्री और फल का प्रयोग करना शुभ माना जाता है।
निशीथ काल में 45 मिनट पूजा का मुहूर्त
जन्माष्टमी पर निशीथ पूजा का मुहूर्त रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। पूजा की अवधि 45 मिनट होगी। मध्यरात्रि का क्षण रात 12:20 बजे रहेगा। चंद्रोदय का समय रात 11:29 बजे बताया गया है। श्रद्धालु इसी अवधि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाकर विधिवत पूजन कर सकते हैं।
ऐसे करें पूजन
बाल गोपाल को पंचामृत से स्नान कराकर पीले वस्त्र पहनाएं। इसके बाद चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। माखन-मिश्री का भोग लगाकर धूप-दीप जलाएं। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय शंख बजाकर आरती करें और प्रसाद वितरित करें। व्रत का पारण स्थानीय पंचांग में निर्धारित समय और परंपरा के अनुसार किया जाएगा।
अष्टमी तिथि
- आरंभ : चार सितंबर, रात 2:25 बजे
- समाप्त : पांच सितंबर, रात 12:13 बजे
- जन्माष्टमी : चार सितंबर 2026
पूजा का शुभ मुहूर्त
- निशीथ पूजा : रात 11:57 से 12:43 बजे तक
- अवधि : 45 मिनट
- मध्यरात्रि का क्षण : रात 12:20 बजे
- चंद्रोदय : रात 11:29 बजे
ऐसे करें श्रीकृष्ण का पूजन
- भगवान श्रीकृष्ण की बाल स्वरूप प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं।
- बाल गोपाल को पीले वस्त्र पहनाकर चंदन, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
- भगवान को तुलसी दल, माखन-मिश्री, फल और अन्य प्रसाद का भोग लगाएं।
- धूप-दीप जलाकर भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप और स्तुति करें।
- मध्यरात्रि में जन्म के समय शंखनाद और घंटा-घड़ियाल के साथ आरती करें।
- भगवान के जन्मोत्सव के बाद प्रसाद वितरित करें और पंचांग में निर्धारित समय पर व्रत का पारण करें।
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