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रामपुर में पत्नी को मायके से बुलाने के लिए दोस्त से कराया बेटे का अपहरण, अगवा कर भेजा उत्तराखंड

Published: Fri, 11 Sep 2026 12:13 AM (IST)

अपनी नाराज पत्नी को मायके से वापस बुलाने के लिए एक पिता ने अपने ही साढ़े तीन साल के बेटे ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. पिता ने पत्नी को बुलाने के लिए बेटे के अपहरण की साजिश रची।

  2. मासूम कार्तिक को दोस्त संग उत्तराखंड भेजा, अपहरण का नाटक किया।

  3. पुलिस ने पिता और दोस्त को गिरफ्तार कर बच्चे को सकुशल बचाया।

संवाद सहयोगी, बिलासपुर (रामपुर)। 20 दिन पहले नाराज होकर मायके गई दूसरी पत्नी विनीता को वापस बुलाने के लिए विकास ने मासूम बेटे कार्तिक के अपहरण का षड्यंत्र रचा। नाटक असली लगे, इसलिए बेटे को दोस्त शंभू के साथ उत्तराखंड के सितारगंज भेज दिया। बावजूद इसके पत्नी तो नहीं लौटी लेकिन विकास की ही सूचना पर जांच में जुटी पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस व तकनीकी साक्ष्यों की मदद ली तो मामला संदिग्ध लगा।

विकास के उत्तराखंड के एक नंबर पर दिन में 38 काल थीं। सीसीटीवी फुटेज में भी कुछ साक्ष्य मिले। ऐसे में गुरुवार को विकास से सख्ती से पूछताछ में हकीकत सामने आ गई। प्रभारी निरीक्षक जीत सिंह ने बताया कि सितारगंज के मकान से बच्चा सकुशल खोजने के साथ ही आरोपित पिता व उसके दोस्त को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात में इस्तेमाल की गई बिना नंबर की बाइक और विकास का हेलमेट भी बरामद कर लिया गया है।

19 साल में की पहली शादी

संत कालोनी निवासी विकास कुमार विकास कुमार नामी कंपनी के दूध की सप्लाई करता है। उसने पहला विवाह 19 वर्ष पहले किया। उस पत्नी से 18 साल का बेटा और 16 वर्ष की बेटी है। वर्ष 2016 में उसने बिलासपुर की ही तरन्नुम से प्रेम विवाह किया। शादी के बाद उसका नाम विनीता हो गया। दोनों से साढ़े तीन वर्ष का बेटा कार्तिक भी है। शादी के बाद घर खर्च के रुपयों को लेकर आए दिन दोनों में झगड़ा होता। शराब के नशे में विकास विनीता को आए दिन पीटता था, परेशान होकर 20 अगस्त को वह बिना बताए मायके चली गई थी।

विकास ने 21 अगस्त को गुमशुदगी भी लिखाई थी। मायके में पत्नी के होने का पता चलने पर विकास लेने गया। वहां ससुरालवालों ने उसे बेइज्जत कर वापस भेज दिया। विकास ने पत्नी को मायके से बुलाने और ससुरालीजन को फंसाने के लिए दोस्त शंभू की मदद से साजिश रची।

उसकी बाइक की नंबर प्लेट हटवाई और बेटे को ले जाते वक्त कोई पहचाने नहीं इसलिए अपना ही हेलमेट दे दिया। पांच सितंबर की शाम बेटे को बिस्किट लेने पास की दुकान पर भेजा। रास्ते में शंभू उसे बहाने से बाइक पर बैठाकर उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले सितारगंज ले गया। उधर, विकास ने पुलिस से शिकायत की। जांच में विकास की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं।


बिलासपुर में लाडले को देख फूट-फूट कर रोई मां

बिलासपुर। जब कोतवाली पुलिस की टीम उत्तराखंड के सितारगंज से मासूम कार्तिक को सकुशल लेकर बिलासपुर थाने पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद भावुक करने वाला था। पिछले पांच दिनों से भूखी-प्यासी राह तक रही मां विनीता उर्फ तरन्नुम अपने जिगर के टुकड़े को देखते ही फूट-फूट कर रो पड़ी।

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उसने तुरंत कार्तिक को गले से लगा लिया। लेकिन जैसे ही पुलिस ने यह खुलासा किया कि इस पूरी प्रताड़ना और खौफ के पीछे कोई और नहीं, बल्कि बच्चे का सगा पिता विकास ही है, वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई। जिस पिता पर बच्चे की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, उसी ने अपनी पारिवारिक रंजिश और अहंकार को संतुष्ट करने के लिए अपने साढ़े तीन साल के मासूम को मोहरा बना दिया।

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लोगों का कहना है कि एक मां को डराने और ससुराल वालों को फंसाने के लिए कोई पिता इस हद तक गिर सकता है, यह सोचकर भी परे है। बहरहाल, कलयुगी पिता अब सलाखों के पीछे है और कार्तिक अपनी मां की आंचल की छांव में सुरक्षित है। इसके अलावा पांच दिनों तक पुलिस के पसीने छूट नजर आए।