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खेत में पानी के विवाद में बहे खून का हिसाब, चाचा-चाची के गुनहगार भतीजे को 6 साल बाद मिली कठोर सजा

Published: Thu, 29 Oct 2026 06:36 PM (IST)

रामपुर में छह साल पुराने पानी के विवाद में चाचा-चाची पर हमला करने वाले भतीजे को अपर जिला जज ने ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, रामपुर। चाचा-चाची पर हमला करने के मामले में अपर जिला जज कुलदीप सिंह ने युवक को दोषी मानते हुए सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। 30 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अंजू सिंह का कहना था कि गवाहों और साक्ष्यों ने घटना को साबित किया है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीसी (महिला विरुद्ध अपराध) कक्ष संख्या ने फैसला सुनाया।न्यायालय ने माना कि आरोपित को सहानुभूति पाने का अधिकारी नहीं है।

उसने फावड़े के डंडे से अपने वृद्ध चाचा-चाची पर हमला किया था। चाचा के सिर में इतनी गंभीर प्रकृति की चोट आई थी, जिससे उनकी मृत्यु कारित होना संभावित थी। संयोग से समय पर अस्पताल ले जाने और सिर की सर्जरी के कारण उनकी जान बच सकी।

हालांकि इस चोट के कारण वह आज भी बातचीत करने तथा समझने बुझने में सक्षम नहीं हैं। चाची भी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुई थीं। उनके दाहिने हाथ में राड डालनी पड़ी, जिसके कारण उस हाथ से वह आज भी सही से कार्य नहीं कर पा रही हैं।

न्यायालय ने रंजीत को सात साल के कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना जमा होने पर वृद्ध दंपती में आधी-आधी धनराशि बांटी जाएगी। अभियोजन के अनुसार, घटना छह साल पहले बिलासपुर कोतवाली क्षेत्र में हुई थी।

गांव बहापुर गंगापुर निवासी रामपाल और उनकी पत्नी इंद्रवती 11 मार्च 2020 को जानवरों के लिए चारा काटने गए थे। पड़ोस में उनके बड़े भाई का खेत है। खेत में पानी भरने से फसल बर्बाद हो रही थी।

उन्होंने अपने भतीजे रंजीत सिंह उर्फ भूरा से पानी का रिसाव बंद करने के लिए कहा, जिस पर भतीजे ने फावड़े के डंडे से उन पर हमला कर दिया। बचाने आई पत्नी इंद्रवती को भी मारा पीटा। आसपास के लोगों के आने पर वह भाग गया।

घायल दंपती के बेटे सरदीप की तहरीर पर पुलिस ने 15 मार्च 2020 को प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस ने 13 अगस्त 2020 को आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। 13 जुलाई 2021 को न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए आरोप तय किए।

नौ अगस्त 2021 से ट्रायल शुरू हुआ। अभियुक्त के बचाव में उनके अधिवक्ता ने झूठी नामजदगी होने की बात कही। अभियोजन की ओर से घटना के समर्थन में 11 गवाह और कई साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।

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