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Karwa Chauth Chand Time: इस समय दिखेगा करवा चौथ का चांद, जानें पूजन विधि और अर्घ्य का सही नियम

Published: Wed, 28 Oct 2026 07:47 PM (IST)

रामपुर में करवा चौथ का व्रत गुरुवार को रखा जाएगा, जिसमें सुहागिनें पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत ...और पढ़ें

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HighLights

  1. शुभ मुहूर्त में पूजन, व्रत कथा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोलेंगी निर्जला व्रत

संवाद सहयोगी, रामपुर। पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ सुहागिनें गुरुवार को करवा चौथ का निर्जला व्रत रखेंगी। दिनभर उपवास के बाद शाम को पूजन और व्रत कथा सुनने की तैयारी है। रात में चंद्रमा के दर्शन के साथ व्रत पूर्ण होगा। रामपुर में गुरुवार को चंद्रोदय रात करीब 8:04 बजे होगा। हालांकि, मौसम, बादलों और स्थानीय परिस्थितियों के कारण चांद दिखाई देने में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

श्री नाथ ज्योतिष केंद्र के आचार्य पंडित नवनीत शर्मा के अनुसार, करवा चौथ का व्रत पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है।

Karwa Chauth Moonlit Puja Guide

इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा का विशेष महत्व है। शाम को पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए पूजन और व्रत कथा करनी चाहिए।

ऐसे करें विधि-विधान से पूजा

सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण कर व्रत का संकल्प लें। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और करवा माता का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।

Karwa Chauth Puja Essentials Under Moonlight

पूजन की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, धूप, पुष्प, मिठाई, फल और जल से भरा करवा रखें। विधि-विधान से पूजन करने के बाद करवा चौथ की कथा सुनें और परिवार की मंगलकामना करें

छलनी से चांद और पति के दर्शन, फिर आरती

रात में चंद्रमा दिखाई देने पर महिलाएं पूजा की थाली लेकर चंद्र दर्शन करेंगी। परंपरा के अनुसार, चंद्रमा को जल अर्पित कर अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखा जाएगा।

Karwa Chauth Puja Steps Infographic

कई परिवारों में पति के चेहरे की ओर दीपक रखकर छलनी से दर्शन करने की परंपरा भी है। इसके बाद महिलाएं पति की आरती उतारेंगी और उनके सुखी व स्वस्थ जीवन की कामना करेंगी।

पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत खोला जाएगा। कई घरों में सास या परिवार की बुजुर्ग महिला को बायना देने की परंपरा भी निभाई जाती है।

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