पूरब से पश्चिम पहुंचा कातिल वायरस: रामपुर में जापानी बुखार का खौफ, 7 साल में 4 की मौत!
जापानी बुखार का वायरस पूर्वी क्षेत्रों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रामपुर में फैल गया है, जिससे पिछले सात सालों ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, रामपुर। जापानी बुखार का असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कम ही रहता है। इसका वायरस ज्यादातर पूरब के क्षेत्रों में पाया जाता है। हालांकि अब पिछले कुछ सालों से यहां भी जापानी बुखार के मामले सामने आने लगे हैं। सात साल में आधा दर्जन से अधिक मामले जापानी बुखार के सामने आ चुके हैं। इनमें चार की मौत भी हो चुकी है।
माना जा रहा है कि पूरब क्षेत्रों से मनुष्यों के जरिए यह वायरस पश्चिम में आया है। जिले में जापानी बुखार का मामला पहली बार वर्ष 2019 में आया था। मिलक ब्लाक के 14 वर्षीय साहिल हुसैन में जापानी बुखार के लक्षण दिखे थे।
वह नगर के जूनियर हाई स्कूल में कक्षा पांच में पढ़ता था। 13 सितंबर 2019 को उसकी मौत हो गई थी। मौत से सात दिन पहले उसे तेज बुखार आया था। उसका नगर के सरकारी अस्पताल में इलाज कराया गया।
मगर, बुखार के न उतरने पर स्वजन ने बरेली के आलाहजरत अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से महाजन अस्पताल ले गए। बाद में दिल्ली के सफदरगंज और फिर दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में भर्ती कराया था। उपचार के दौरान खून की जांच में जापानी बुखार की पुष्टि हुई थी।
वर्ष 2022 में जापानी बुखार के चार मरीज मिले थे। चारों हल्द्वानी में इलाज करा रहे थे। इनमें दो की मौत हो गई थी। मृतकों में स्वार के गद्दीनगली गांव के 80 वर्षीय मोहन लाल भी थे। उनकी दो सितंबर को इलाज के दौरान मौत हुई थी।
जबकि 21 सितंबर को मिलक के हरदासपुर गांव के सात वर्षीय निहार की जापानी बुखार से मौत हुई थी। अब बिलासपुर के खजुरिया कला गांव के तीन साल के अबुजर पुत्र नाहिद खां की मौत के बाद फिर ये बुखार को लेकर चर्चा हो रही है।
एक साल पहले सिकरौल गांव में मिला था जापानी बुखार का मरीज
जिले में जापानी बुखार (जापानी इंसेफेलाइटिस) के मरीज की मौत से हड़कंप मचा है। लगातार दो सालों से जिले में जापानी बुखार का मरीज मिल रहा है। पिछले साल पटवाई थाना क्षेत्र के सिकरौल गांव में जापानी बुखार का मरीज मिला था।
सिकरौल गांव चमरौआ ब्लाक के अंतर्गत आता है। इस गांव की 12 साल की बच्ची सीता उर्फ शिखा पुत्री रूपचंद्र चार नवंबर 2025 को जापानी बुखार से संक्रमित हुई थी।
उसका दिल्ली एम्स में इलाज चला था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में 100 से अधिक लोगों की डेंगू, मलेरिया आदि की जांच की गई थी। 40 लोगों में जापानी बुखार की जांच की गई थी।
ऐसे फैलता है जापानी बुखार
जापानी बुखार का वायरस मुख्य रूप से सुअरों के शरीर में रहता है। संक्रमित सुअर का खून मच्छर द्वारा पीने पर वह भी संक्रमित हो जाता है। संक्रमित मच्छर जब किसी स्वस्थ मनुष्य को काटता है तो वह वायरस मनुष्यों के शरीर में भी प्रवेश कर जाता है।
ऐसे करें बचाव
- 1 से 15 साल तक के बच्चों को जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) का टीका लगवाएं।
- पूरी आस्तीन की शर्ट, पैंट और जूते मोजे पहनें।
- रात में सोते समय हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- घरों की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाएं, ताकि मच्छर अंदर न आ सकें।
- घर के आसपास गमलों, टायरों, कूलर या गड्ढों में पानी एकत्र न होने दें।
- सुअर पालन आबादी से दूर रखें।
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