26 दिन की जंग, ₹1.5 लाख खर्च... फिर भी हार गया 3 साल का अबुजर; बिलासपुर में जापानी बुखार ने छीनी मासूम की सांसें
बिलासपुर में तीन साल के मासूम अबुजर की जापानी बुखार से 26 दिन की जंग के बाद मौत हो गई, ...और पढ़ें

गांव खजुरिया कलां में मृतक अबुजर के आवास पर गमजदा बैठे स्वजन और इनसेट में अबुजर की फाइल फोटो
HighLights
ट्रक चलाकर गुजर बसर करते हैं मृतक अबुजर के पिता
संवाद सहयोगी, बिलासपुर (रामपुर)। एक गरीब पिता की जिंदगी भर की कमाई, 26 दिनों की अंतहीन रातें, अस्पतालों के चक्कर और चौखटों पर मांगी गई मन्नतें... सब कुछ हार गईं। जापानी बुखार की गिरफ्त में आए तीन साल के मासूम अबुजर ने आखिरकार दम तोड़ दिया।
यह सिर्फ एक बच्चे की मौत नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों की लाचार स्वास्थ्य व्यवस्था और एक ट्रक चालक पिता के आंसुओं की वह दास्तान है, जो हर दिल को झकझोर कर रख देती है।
खजुरिया कलां गांव के रहने वाले ट्रक ड्राइवर नाहिद खां का निकाह वर्ष 2023 में हुआ था। दो मासूम बच्चे तीन वर्षीय अबुजर और 11 माह के अबुजहन की किलकारियों से घर में रौनक थी। कुछ दिन पहले अबुजर को तेज बुखार ने अपनी चपेट में ले लिया।
यहीं से शुरू हुआ पिता का अपनी औलाद को बचाने का वह संघर्ष, जिसने अंत में उसे आर्थिक और मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया। स्वजन अबुजर को बुखार में तपता देख सबसे पहले स्थानीय स्तर पर एक निजी अस्पताल ले गए।
वहां चिकित्सकों ने चार से पांच घंटे तक इलाज के बाद उत्तराखंड रेफर कर दिया। रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल में भी 15 से 20 हजार रुपये खर्च हो गए, लेकिन राहत की एक सांस तक नसीब नहीं हुई।
अंततः मासूम को लेकर स्वजन 45 किलोमीटर दूर उत्तराखंड के सरकारी अस्पताल सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचे। 26 दिनों तक नाहिद खां और उनके स्वजन अस्पताल के वार्डों के बाहर फुटपाथ पर बैठे पथराई आंखों से चमत्कार का इंतजार करते रहे।
नाहिद की जमा पूंजी खत्म हो गई। रिश्तेदारों से कर्ज भी लिया। लेकिन सब व्यर्थ हो गया। गांव के लोगों का कहना है कि अगर समय रहते बिलासपुर या आसपास के सरकारी अस्पतालों में जापानी बुखार का सही इलाज और वेंटिलेटर की सुविधा मिल जाती, तो शायद नाहिद को पड़ोसी राज्य के चक्कर नहीं काटने पड़ते। नाहिद खां का राशनकार्ड नहीं है। जिसकी वजह से उनका आयुष्मान कार्ड भी नहीं बन सका।
इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
मृतक अबुजर के स्वजन का आरोप है कि उत्तराखंड के सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई। दवाओं और इलाज के नाम पर खूब लूट खसोट की गई। आरोप लगाया कि वहां स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं।
इसकी वजह से लोगों को बेहतर इलाज मिल पाना असंभव है। बताया कि उन्होंने उत्तराखंड की सरकार को इंटरनेट मीडिया के माध्यम से इस समस्या से अवगत भी करवाया है ताकि, अन्य लोगों को बेहतर इलाज मिल सके
सर्वे पूरा, अब एक टीम रख रही स्थिति पर नजर
कार्यवाहक चिकित्साधीक्षक डाॅ. मणिक अग्रवाल ने बताया कि गांव में जापानी बुखार की पुष्टि होते ही विभाग ने तुरंत एक्शन लिया था। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए छह विशेष टीमों का गठन किया गया।
टीमों ने गांव में घर-घर जाकर ग्रामीणों की थर्मल स्क्रीनिंग की, उनके स्वास्थ्य का परीक्षण किया। सर्वे पूरा होने के बाद सभी छह टीमों को वापस बुला लिया गया है। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से उनके स्थान पर फिलहाल एक निगरानी टीम को तैनात रखा गया है।
ये नए लक्षण वाले मरीजों पर नजर रख रही है। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे मच्छरों से बचाव रखें और बुखार होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को सूचित करें।
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