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धमाके के साथ धंसा बिलासपुर का ऐतिहासिक भाखड़ा डैम, मुख्य ढांचे में 5 इंच चौड़ी दरारें; अलर्ट जारी

Published: Mon, 21 Sep 2026 02:02 PM (IST)Updated: Mon, 21 Sep 2026 02:22 PM (IST)

बिलासपुर के ऐतिहासिक भाखड़ा नदी बांध को बचाने के लिए बनाया गया अस्थाई तटबंध टूट गया, जिससे नदी का पानी ...और पढ़ें

भाखड़ा बांध में आई दरार और मौके पर काम करते मजदूर

भाखड़ा बांध में आई दरार और मौके पर काम करते मजदूर

HighLights

  1. विफलता के बाद मुख्य डैम के अस्तित्व पर मंडराया संकट

संवाद सहयोगी, बिलासपुर (रामपुर)। नगर के ऐतिहासिक भाखड़ा नदी बांध को बचाने के लिए पिछले एक सप्ताह से चल रही नहर विभाग और जिला प्रशासन की भारी मशक्कत पर पानी फिर गया है। नदी की तेज धारा को रोकने और उसे दूसरी दिशा में मोड़ने के लिए दिन-रात एक करके बनाया गया मजबूत अस्थाई तटबंध (काफर डैम) पानी के अत्यधिक दबाव को नहीं झेल सका और टूट गया।

तटबंध के टूटते ही नदी का भारी जलप्रवाह दोबारा डैम के मुख्य हिस्से की तरफ मुड़ गया, जिससे बंद हुआ जल रिसाव एक बार फिर पूरी रफ्तार से शुरू हो गया है। इस विफलता के बाद मुख्य डैम के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है।

प्रत्यक्षदर्शियों और बांध स्थल पर काम कर रहे मजदूरों के अनुसार, सोमवार सुबह लगभग एक सप्ताह की कड़ी मशक्कत के बाद बनाया गया तटबंध टूट गया। इसके बाद पानी दोबारा से रिसाव वाले स्थान से बहने लगा।

इसी दौरान करीब 10 बजे अचानक स्थिति बेहद डरावनी हो गई। धमाके के साथ डैम का दायां हिस्सा और ऑटोमेटिक गेट के आगे का फर्श अचानक नीचे धंस गया। आवाज इतनी तेज थी कि मौके पर काम कर रहे मजदूरों और विभागीय कर्मचारियों में खलबली मच गई।

इस घटना के बाद मुख्य बांध के कंक्रीट स्ट्रक्चर में चार से पांच इंच तक की दरारें साफ तौर पर उभर आईं, जिससे अब बांध के पूरी तरह ढहने का खतरा बढ़ गया है। डैम पर काम कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि दाएं हिस्से में स्लूज गेट के पीछे अंडरग्राउंड वाटर का रिसाव हो रहा था।

विभाग ने आधुनिक जियो ट्यूब और मिट्टी की बोरियों से नदी का रुख उत्तर की तरफ मोड़ने की योजना बनाई थी। लेकिन जैसे ही अस्थाई तटबंध से पानी रोका गया, मुख्य ढांचे के नीचे का अंदरूनी खोखलापन और पानी का बैक-प्रेशर बढ़ गया।

इससे दोबारा डैम का भारी-भरकम हिस्सा नीचे बैठ गया और तटबंध भी ढह गया। डैम धंसने की खबर नगर और आस-पास के गांवों में आग की तरह फैल गई, जिससे मौके पर तमाशबीनों की भारी भीड़ जमा हो गई।

स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सिंचाई और नहर विभाग के आला अधिकारी, सहायक अभियंता और अवर अभियंता पुलिस बल के साथ मौके पर डटे हुए हैं। सुरक्षा के लिहाज से बांध के प्रभावित रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और आम लोगों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया गया है।

भाखड़ा डैम पर लगा आटोमेटिक वियर गेट खतरे में, रिसाव से धंसा फाउंडेशन

इससे पहले भाखड़ा डैम पर बने प्रदेश के पहले आटोमेटिक वियर गेट का फाउंडेशन नीचे से धंस गया है। जलाशय के पानी में लंबे समय से हो रहे अंदरूनी रिसाव ने डैम के ढांचे को अंदर ही अंदर बड़ा नुकसान पहुंचाया है।

इस रिसाव के चलते डैम के समीप बने पुराने पुल के पिलर भी नीचे की ओर धंस गए हैं। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन सिंह ने कहा कि वियर गेट को खतरा नहीं है, जल्द ही फ़ाउंडेशन की मरम्मत हो जाएगी।

सिंचाई विभाग द्वारा जब दरार की मरम्मत का काम शुरू किया गया, तब रविवार देर शाम इस बेहद संवेदनशील और खतरनाक स्थिति का पता चला। सिंचाई विभाग पिछले कुछ दिनों से भाखड़ा डैम पर बनी दरार की मरम्मत के कार्य में जुटा है।

इस प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों ने पहले एक मजबूत तटबंध तैयार किया और नदी की जलधारा को दूसरी तरफ मोड़ दिया। रविवार की देर शाम जब पानी का बहाव पूरी तरह से रुक गया और सूखी सतह सामने आई, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए।

पानी के लगातार हो रहे गुप्त रिसाव के कारण आटोमेटिक वियर गेट के नीचे की जमीन पूरी तरह खोखली निकली और दाईं ओर से उसका फाउंडेशन बैठ गया है। यह वियर गेट तकनीक और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रदेश का पहला ऐसा गेट है जो पानी के दबाव के अनुसार खुद संचालित होता है।

फाउंडेशन धंसने से न सिर्फ इस गेट के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है, बल्कि पास ही मौजूद पुराने पुल के पिलरों के धंसने से भी डैम को बड़ा खतरा हो सकता है।

पानी के इस अंदरूनी कटाव को अगर समय रहते नहीं रोका जाता, तो डैम के मुख्य ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं।

फिलहाल नुकसान के आकलन के लिए तकनीकी टीमों को तैनात किया जा रहा है। अधिशासी अभियंता का कहना है कि पहली प्राथमिकता रिसाव के मुख्य स्रोत को ढूंढकर उसे बंद करने की है, जिसके लिए विशेष ग्राउटिंग तकनीक का सहारा लिया जा सकता है।

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