भाखड़ा डैम में बड़ा संकट: बही लाखों की कंक्रीट, फेल हुई आधुनिक तकनीक; अब इस प्लान से रुकेगा पानी
भाखड़ा डैम में नदी की धारा मोड़ने और बांध के फर्श की मरम्मत के शुरुआती प्रयास भारी पानी के दबाव ...और पढ़ें

भाखड़ा डैम पर तटबंध बनाती जेसीबी। जागरण
HighLights
जब तक पानी का बहाव नहीं रुकता, तब तक दरारों की मरम्मत का काम रहेगा ठप
संवाद सहयोगी, बिलासपुर (रामपुर)। भाखड़ा डैम में नदी की धारा को दूसरी तरफ मोड़ने और बांध के फर्श की मरम्मत के शुरुआती प्रयास असफल हो गए। पानी के अत्यधिक बहाव और भारी दबाव के आगे विभाग द्वारा अपनाई गई आधुनिक जियो ट्यूब तकनीक और कंक्रीट का सुरक्षा कवच नाकाम साबित हुआ।
तकनीकी विफलता के बाद अब विभाग ने पारंपरिक, लेकिन मजबूत तरीका अपनाते हुए नदी की धारा को रोकने के लिए विशाल तटबंध बनाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है।
बांध के फर्श पर आई गहरी दरारों को ठीक करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती नदी के पानी के बहाव को रोकना था। इसके लिए विभाग ने लाखों रुपये की लागत से विशेष जियो ट्यूब मंगाकर नदी की धारा के बीच में स्थापित की थीं।
दावा किया जा रहा था कि ये ट्यूब पानी के रुख को दूसरी दिशा में मोड़ देंगी, जिससे सूखा इलाका मिलने पर मरम्मत का काम आसानी से हो सकेगा। लेकिन, पहाड़ी इलाके से आ रहे पानी का वेग इतना प्रचंड था कि ये भारी-भरकम जियो ट्यूब पानी को रोकने में पूरी तरह असफल रहीं और दबाव नहीं झेल पाईं।
जियो ट्यूब के फेल होने के साथ ही विभाग को एक और बड़ा झटका लगा है। इंजीनियर्स की देखरेख में बांध के क्षतिग्रस्त फर्श की दरारों को भरने के लिए भारी मात्रा में जो कंक्रीट डाला गया था, वह भी पानी की तेज धार के आगे टिक नहीं सका।
कंक्रीट के सूखने और सेट होने से पहले ही पानी का स्तर अचानक बढ़ गया, जिससे पूरी कंक्रीट सामग्री पानी में बह गई। इस वजह से विभाग की अब तक की मेहनत पर पानी फिर गया।
असफल होने के बाद विभाग के उच्च अधिकारियों और तकनीकी टीम ने आपात बैठक बुलाई और अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। एसडीओ नंदलाल आर्य ने बताया कि अस्थाई तकनीक के बजाय मौके पर मिट्टी, पत्थरों और बोल्डर्स की मदद से एक मजबूत और स्थाई तटबंध बनाया जाएगा।
इस तटबंध के जरिए नदी की धारा को पूरी तरह से दूसरी साइड में डाइवर्ट किया जाएगा। जब तक इस नए तटबंध का निर्माण पूरा नहीं हो जाता और मरम्मत वाले हिस्से से पानी का रिसाव पूरी तरह बंद नहीं हो जाता, तब तक मुख्य दरारों को ठीक करने का काम नहीं हो पाएगा।
फिलहाल, भारी मशीनों और पोकलेन के साथ सैकड़ों मजदूर दिन-रात तटबंध बनाने के काम में जुटे हुए हैं ताकि मानसून या आने वाले दिनों में पानी का स्तर और बढ़ने से पहले स्थिति को नियंत्रण में लिया जा सके।
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