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भाखड़ा डैम में पड़ी दरार से 90 गांवों में हड़कंप: 15 हजार हेक्टेयर फसल पर संकट, 20 हजार किसानों की बढ़ी चिंता

Published: Mon, 21 Sep 2026 06:47 PM (IST)

भाखड़ा डैम में दरारें आने से बिलासपुर क्षेत्र के 88-90 गांवों के करीब 20 हजार किसानों की चिंता बढ़ गई ...और पढ़ें

भाखरा बांध में पड़ी दरार

भाखरा बांध में पड़ी दरार

HighLights

  1. डैम में दरारों से किसानों की बढ़ी चिंता, कैसे बुझेगी खेतों की प्यास

संवाद सहयोगी, बिलासपुर (रामपुर)। भाखड़ा नदी पर बने डैम के ढांचे में बड़ी दरारें सामने आने के बाद क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है। डैम से पानी मिलने के भरोसे खेती करने वाले किसानों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि यदि डैम की स्थिति के कारण पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई तो खेतों की सिंचाई कैसे होगी। किसानों को अपनी खड़ी फसलों के साथ आने वाले फसली सीजन की भी चिंता सताने लगी है।

तहसील क्षेत्र की करीब 15 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई डैम से होती है। करीब 88 से 90 गांवों के लगभग 20 हजार किसानों को इसका सीधा लाभ मिलता है। ऐसे में डैम के ढांचे में आई दरारें केवल निर्माण की समस्या नहीं हैं।

इनका सीधा संबंध क्षेत्र की खेती और किसानों की आजीविका से जुड़ा है। किसानों के लिए सिंचाई खेती की रीढ़ है। फसल को समय पर पानी नहीं मिलने से पैदावार प्रभावित होने की आशंका रहती है।

यदि डैम की मरम्मत या सुरक्षा के लिए पानी की आपूर्ति कम करनी पड़ी अथवा रोकनी पड़ी तो हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों को निजी साधनों से सिंचाई करनी पड़ सकती है, जिससे खेती की लागत भी बढ़ने की आशंका है।

क्षेत्र के हजारों किसान डैम की सिंचाई व्यवस्था के भरोसे अपनी फसल तैयार करते हैं। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में बीज, खाद, जुताई, मजदूरी और सिंचाई पर पहले ही काफी खर्च हो जाता है।

ऐसे में यदि निर्णायक समय पर पानी नहीं मिला तो फसल की पैदावार पर असर पड़ सकता है। किसानों को आशंका है कि सिंचाई का संकट बढ़ा तो उनकी आर्थिक स्थिति पर भी इसका असर पड़ेगा।

हालांकि किसानों की मांग है कि डैम के ढांचे में आई दरारों की विशेषज्ञों से तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए। यह भी स्पष्ट किया जाए कि दरारों की स्थिति कितनी गंभीर है और मरम्मत कार्य के दौरान सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता किस तरह सुनिश्चित की जाएगी।

किसानों का कहना है कि डैम की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन खेतों की सिंचाई की व्यवस्था को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं, डैम से सीधे लाभान्वित होने वाले गांवों में किसानों के बीच इसी बात की चर्चा है कि आने वाले दिनों में पानी की स्थिति क्या रहेगी।

किसान विभाग से डैम की मौजूदा स्थिति और सिंचाई व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी चाहते हैं, ताकि वे समय रहते फसल की सिंचाई के लिए वैकल्पिक इंतजाम कर सकें। इसके अलावा प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।

एक ओर डैम के ढांचे की सुरक्षा और मरम्मत की चुनौती है तो दूसरी लगभग 15 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि और 20 हजार किसानों की सिंचाई व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी।

ऐसे में किसानों की नजर अब संबंधित विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट कर वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था तैयार नहीं की गई तो डैम की दरारों का असर खेतों तक पहुंचने की आशंका से किसानों की चिंता और बढ़ सकती है।

डैम से जुड़ी समस्या का असर सीधे खेती और किसानों की आय पर पड़ेगा। अगर समय रहते कृषि भूमि या फसलों को पानी नहीं मिला तो किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। - फाजिल हुसैन

अगर उन्हें सिंचाई के लिए पानी नहीं मिला तो धान की फसल सूख सकती है। उसका दाना भी कमजोर हो जाएगा। - हरिशंकर यादव

क्षेत्रीय विधायक और विभागीय अधिकारियों को प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजना चाहिए और यहां नए डैम का निर्माण करवाया जाना चाहिए। - जगजीत सिंह गिल


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