जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण पर 25 अगस्त को सुनवाई, आजम खां के समर्थकों की टिकीं निगाहें
जौहर विश्वविद्यालय के 38 अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश पर मंडलायुक्त न्यायालय में सुनवाई चल रही है, जिसकी अगली तिथि ...और पढ़ें

जौहर विश्वविद्यालय
HighLights
मंडलायुक्त के न्यायालय में चल रही सुनवाई
जागरण संवाददाता, रामपुर। जौहर विश्वविद्यालय में बिना मानचित्र स्वीकृत कराए 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश पर मंडलायुक्त के न्यायालय में चल रही सुनवाई पर आजम खान के खेमे की नजरें लगी हैं। इसकी अगली तिथि 25 अगस्त नियत है। हालांकि, निवर्तमान मंडलायुक्त आंजनेय कुमार की समयावधि बढ़ाए जाने को लेकर अभी शासन से कोई आदेश नहीं आया है। इसके चलते फिलहाल अभी इस प्रकरण पर सुनवाई लंबित रहने के आसार हैं।
आजम खान द्वारा मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के ज़रिये मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर कुल 40 भवनों में 38 भवनों का निर्माण मानचित्र की स्वीकृति लिए बिना कराया गया था। जिलाधिकारी ने 28 जून को विश्वविद्यालय में एक टीम भेजकर भवनों की नापजोख कराते हुए उनके मानचित्र तलब किए थे।
मगर विश्वविद्यालय प्रबंधन कुल 40 भवनों में सिर्फ दो भवनों मेडिकल काॅलेज और अकादमी ब्लाॅक का मानचित्र ही प्रस्तुत कर सका। इस पर आरडीए (रामपुर विकास प्राधिकरण) ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया था। विश्वविद्यालय की ओर से दिए गए जवाब में तर्क दिया गया कि उक्त भवनों के निर्माण के समय आरडीए अस्तित्व में ही नहीं था।
विश्वविद्यालय ग्राम पंचायत सींगनखेड़ा में स्थित है। ऐसे में आरडीए को किसी भी तरह की कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। जिलाध्यक्ष ने उनके तर्क को इस तथ्य के साथ खारिज कर दिया कि तब जिला पंचायत से मानचित्र स्वीकृत कराया जाना चाहिए था। यह भी कहा कि ट्रस्ट को नियमों की भलीभांति जानकारी भी थी।
इसी के चलते ट्रस्ट ने विश्वविद्यालय के दो भवनों का मानचित्र स्वीकृत भी कराया था। ऐसे में ये दलील स्वीकार करने योग्य नहीं है। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने जौहर विश्वविद्यालय प्रबंधन को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए एक मौका और दिया था।
15 जुलाई विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. नूर उल सलाम अपने अधिवक्ता नासिर सुल्तान के साथ जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर अपने तर्क प्रस्तुत किए थे। जिलाधिकारी ने उनके तर्क खारिज करते हुए 15 दिन में अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश जारी कर दिए थे।
इस आदेश के खिलाफ आजम खान के ट्रस्ट की ओर से मंडलायुक्त के न्यायालय में सुनवाई चल रही है। आजम खान के समर्थक आरडीए के आदेश को अवैध बताते हुए दावा कर रहे हैं कि इसी क्रम में मंडलायुक्त ने उस पर रोक लगाई है।
जबकि सुनवाई पूरी होने तक निचली अदालत का आदेश अगले फैसले तक स्वत: स्थगित माना जाता है। ऐसे में ध्वस्तीकरण को लेकर मंडलायुक्त का फैसला आजम खान के लिए काफी अहम साबित होगा।
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