जागरण संवाददाता, रामपुर : जिला सहकारी विकास संघ (डीसीडीएफ) की दुकानों के मामले में सांसद आजम खां की अग्रिम जमानत पर कोई फैसला नहीं हो सका। अदालत अब बुधवार को सुनवाई करेगी।

डीसीडीएफ की रेलवे स्टेशन रोड स्थित दुकानों पर पहले क्वालिटी बार हुआ करता था। बार का संचालन बीपी कालोनी निवासी गगन लाल अरोरा पुत्र हरनारायन द्वारा किया जाता था। बार मालिक ने करीब एक माह पहले सिविल लाइंस कोतवाली में जबरन दुकान में घुसकर तोड़फोड़ करने और लूटपाट की धारा में सांसद व अन्य के खिलाफ मुकदमा कराया था।

आरोप था कि वर्ष 2013 में प्रदेश में सपा की सरकार थी। आजम खां तब मंत्री थे। 13 फरवरी 2013 को आजम खां के साथ सेवानिवृत सीओ आले हसन खां (तब सिविल लाइंस थाना प्रभारी थे), जिला सहकारी बैंक के तत्कालीन चेयरमैन मास्टर जाफर और संघ के सचिव कामिल खां दुकान पर आए। उनके साथ सिविल लाइंस थाने की फोर्स भी थी। उन्होंने आते ही दुकान का सामान फेंकना शुरू कर दिया। पूछने पर कहने लगे कि यह दुकान सांसद आजम खां की पत्नी राज्यसभा सदस्य डॉ. तजीन फात्मा के नाम आवंटित होनी है। इसे खाली कर दो।

इसके बाद आरोपितों ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया अपनाए दुकान जबरन खाली करा ली। दुकान का सामान सड़क पर फेंक दिया। इससे उनका करीब दो लाख रुपये का नुकसान हो गया। दुकान के गल्ले में रखे 16500 रुपये भी लूट ले गए। बाद में पता चला कि डीसीडीएफ ने उन्हें बेदखल कर दुकान सांसद की पत्नी के नाम आवंटित कर दी है। इस मामले में गिरफ्तारी से बचने को सांसद ने सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।

बुधवार को याचिका पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष और अभियोजन के अधिवक्ताओं ने बहस भी की। बहस जारी है। जिला शासकीय अधिवक्ता दलविदर सिंह डंपी ने बताया कि कोर्ट 23 अक्टूबर को फिर सुनवाई करेगी।

Posted By: Jagran

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