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आजम खां की बढ़ीं मुश्किलें: 100 से ज्यादा केस और ₹400 करोड़ का हिसाब, भ्रष्टाचार के 3 बड़े मामलों में फंसा शिकंजा

Published: Thu, 15 Oct 2026 05:00 AM (IST)

सपा नेता आजम खां, जो 100 से अधिक मुकदमों को साजिश बताते रहे हैं, अब भ्रष्टाचार के तीन नए गंभीर ...और पढ़ें

आजम खान

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HighLights

  1. रामपुर में दो और लखनऊ में भ्रष्टाचार की एक प्राथमिकी हो चुकी दर्ज

अनिल अवस्थी, रामपुर। 100 से अधिक मुकदमों को साजिश का परिणाम बताकर भ्रष्टाचार के एक भी आरोप से बेदाग होने का दावा करने वाले सपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान अब भ्रष्टाचार के तीन मामलों में घिर गए हैं। सीतापुर जेल से पिछले वर्ष 23 सितंबर को रिहाई के बाद उन्होंने कई मंचों से अपनी बेगुनाही का दावा किया था।

अब हज समिति की जमीन के कथित नियमविरुद्ध हस्तांतरण, सरकारी इमारत पर अवैध कब्जे और विश्वविद्यालय निर्माण में धन के कथित दुरुपयोग के मामलों में जांच एजेंसियों का शिकंजा कस रहा है।

विजिलेंस ने आठ सितंबर को तत्कालीन राज्य हज समिति अध्यक्ष आजम खान समेत पांच लोगों के खिलाफ लखनऊ में भ्रष्टाचार की प्राथमिकी दर्ज कराई।

आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर हज समिति की जमीन नियमों के विपरीत आमिश डेवलपर्स के नाम रजिस्ट्री करा दी। इससे समिति को दो करोड़ रुपये से अधिक की क्षति होने का आरोप है।

मामले की विवेचना जारी है। रामपुर के सिविल लाइंस थाने में भी आजम खान के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज है। इसमें आरोप है कि नवाब रामपुर की बनवाई गई इमारत को बैकडेट में आवंटित कराकर उस पर अवैध कब्जा किया गया।

इस मामले में सतर्कता अधिष्ठान, बरेली के इंस्पेक्टर शैलेष त्यागी ने छह सितंबर 2021 को अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। शिकायत के बाद शासन ने दोबारा विवेचना के आदेश दिए।

इसके बाद विजिलेंस ने 21 सितंबर 2024 को न्यायालय से पुनर्विवेचना की अनुमति प्राप्त की। मामला अभी लंबित है। अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आजम खान के खिलाफ अजीमनगर थाने में भ्रष्टाचार की प्राथमिकी दर्ज कराई है।

इसमें ठेकेदारों के जरिये कथित कमीशनखोरी, सरकारी धन के दुरुपयोग और दान के नाम पर काली कमाई के इस्तेमाल के आरोप हैं। विश्वविद्यालय निर्माण पर खर्च हुई 400 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के स्रोत और हिसाब-किताब पर भी सवाल उठाए गए हैं।

भ्रष्टाचार के मामलों के साथ ईडी धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, तीनों प्रकरणों में आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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