साल भर बाद जेल में आमने-सामने होंगे अखिलेश और आजम खान, यूपी चुनाव से पहले सपा की गुटबाजी खत्म करने का बड़ा दांव
अखिलेश यादव एक साल बाद रामपुर जेल में आजम खान से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात पार्टी की अंदरूनी कलह को ...और पढ़ें

आजम खान और अखिलेश यादव
HighLights
आजम खान के जरिए अधिक सीटें जीतने का प्रयास करेगी समाजवादी पार्टी
जागरण संवाददाता, रामपुर। साल भर बाद आज फिर अखिलेश यादव और आजम खान आमने-सामने होंगे। इस दौरान अखिलेश पार्टी में चल रही अंतर्कलह थामने और आजम के साथ खड़े होने का संदेश देने का प्रयास करेंगे। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों को लेकर भी आजम से राय-मशविरा की जाएगी।
गुरुवार को अखिलेश यादव दोपहर में हेलीकाप्टर से रामपुर पहुंच जाएंगे। वह यहां जेल जाकर पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात करेंगे। इससे पहले आठ अक्टूबर 2025 को अखिलेश रामपुर आए थे और सीतापुर जेल से जमानत पर रिहा होकर घर पहुंचे आजम खान से उनके आवास पर मुलाकात की थी।
विधानसभा चुनाव नजदीक है। समाजवादी पार्टी आजम खान के जरिए जिले की अधिक से अधिक सीट जीतने का प्रयास कर रही है। किसी समय जिले में सबसे अधिक सीटें सपा के पास थीं।
शहर विधानसभा सीट तो सपा का गढ़ रही है। आजम खान इस सीट से 10 बार विधायक रहे हैं। स्वार-विधानसभा सीट से दो बार बेटे अब्दुल्ला को विधायक बना चुके हैं।
चमरौआ सीट भी लगातार दो बार से सपा के पास रही है। अब भी आजम खान के करीबी नसीर खां चमरौआ सीट से विधायक हैं। वर्तमान में समीकरण बदले हुए हैं। सिर्फ एक सही ही सपा के पाले में है।
ऐसे में सपा मुखिया आजम खान के जरिए जिले से अधिक से अधिक सीट जीतना चाहते हैं। जेल में मुलाकात के जरिए सपा नेतृत्व यह संदेश देने की कोशिश करेगा कि मुश्किल दौर में भी पार्टी अपने पुराने और प्रभावशाली नेताओं के साथ खड़ी है।
सपा मुखिया के रामपुर आगमन को पार्टी की गुटबाजी खत्म करने के उद्देश्य से भी देखा जा रहा है। जिले में सपा के भीतर गुटबाजी पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई है। यहां एक खेमा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी के साथ खड़ा नजर आता है, जबकि दूसरा आजम खान का समर्थक माना जाता है।
दोनों नेताओं के बीच कई बार जुबानी जंग भी सामने आ चुकी है। आजम खान की नाराजगी के बावजूद अखिलेश यादव सांसद को तवज्जो देते रहे हैं। ऐसे में उनके सामने दोनों खेमों को साधने की चुनौती बनी हुई है।
अखिलेश की आजम खान से मुलाकात को इस नजरिए से भी देखा जाएगा कि क्या पार्टी नेतृत्व दोनों पक्षों के बीच बढ़ती दूरी कम करने में कोई कामयाबी हासिल कर पाता है। हालांकि, मुलाकात भर से गुटबाजी खत्म होने की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
इसके बावजूद आजम खान से संवाद बनाए रखना सपा के लिए राजनीतिक रूप से अहम है। आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में यदि हाई कोर्ट से राहत मिलती है तो उनके जेल से बाहर आने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
उनके समर्थक और परिवार के सदस्य विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। उनके चुनाव लड़ने पर भले ही रोक लगी है, लेकिन यदि वह जेल से बाहर रहे तो उनकी मौजूदगी रामपुर में सपा के पक्ष में माहौल बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
ऐसे में अखिलेश की मुलाकात पार्टी के पुराने सियासी आधार को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि इस मुलाकात से रामपुर में सपा की अंदरूनी खींचतान पर कितना असर पड़ता है और आगामी चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
