स्विट्जरलैंड में बोर्ड पर लिखी बात से प्रेरित हुए रि. एजीएम, भारत आते ही संवारने लगे ‘भविष्य’
अचलराज पांडे ने स्विट्जरलैंड में एक बोर्ड से प्रेरित होकर सेवानिवृत्ति के बाद रामपुर में बच्चों को मुफ्त गणित पढ़ाना शुरू किया।
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डायमंड रोड स्थित अपने आवास पर बच्चों को पढ़ाते अचल राज पांडेय। जागरण
HighLights
स्विट्जरलैंड में बोर्ड से प्रेरित होकर शुरू की निःशुल्क शिक्षा।
सेवानिवृत्ति के बाद 11 वर्षों से बच्चों को मुफ्त गणित पढ़ा रहे।
'आरोग्य चेतना मंच' से सैकड़ों जरूरतमंद बच्चों की मदद की।
राधेश्याम, रामपुर। स्विट्जरलैंड में स्कूल के बाहर लगे छोटे से बोर्ड ने अचलराज पांडे की जिंदगी की दिशा बदल दी। उस पर लोगों से अपने खाली समय का उपयोग बच्चों को पढ़ाने की अपील लिखी थी। उन्होंने इसे सिर्फ देखा नहीं, बल्कि जीवन में उतार लिया।
बैंक की नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद अचलराज पांडे ने अपना घर ही बच्चों की पाठशाला बना लिया। पिछले 11 वर्षों से उनके घर में रोज 40 से 50 बच्चे निशुल्क गणित पढ़ने पहुंचते हैं। उम्र बढ़ती गई, लेकिन बच्चों का भविष्य संवारने का जुनून कम नहीं हुआ है।
करीब 300 जरूरतमंद बच्चों की कर चुके मदद
अब तक करीब 165 बेटियों को हाई स्कूल तक की परीक्षा पास कराने में सहयोग दे चुके हैं। करीब 300 जरूरतमंद बच्चों की फीस, किताब-कापी, ड्रेस आदि की व्यवस्था में भी सहयोग कर चुके हैं। वह स्कूलों से संपर्क कर जरूरतमंद बच्चों की जानकारी लेते हैं और उनकी फीस, किताब-कापी व ड्रेस आदि में सहयोग करते हैं।
उन्होंने इसके लिए उन्होंने 16 नवंबर 2017 आरोग्य चेतना मंच की स्थापना को स्थापना की। दस वर्षों से निशुल्क कक्षाओं के साथ शिक्षा संबंधी गतिविधियां संचालित कर रहा है।
डायमंड सिनेमा के पास गायत्रीपुरम स्थित उनके आवास पर शाम होते ही बच्चों की चहल-पहल शुरू हो जाती है। शाम चार से छह बजे तक चलने वाली कक्षा में कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थी गणित पढ़ते हैं। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थी भी शामिल हैं।
अचलराज पांडे बताते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद वह स्विट्जरलैंड गए थे। वहां एक स्कूल के बाहर खाली समय में बच्चों को पढ़ाने की अपील वाला बोर्ड देखा। यह दृश्य उनके मन में बस गया।
भारत लौटने के बाद उन्होंने बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का निर्णय लिया। बच्चे जब कठिन समझे जाने वाले गणित को आसानी से हल करते हैं और उनके चेहरे पर आत्मविश्वास दिखाई देता है तो बहुत संतोष मिलता है।
पढ़ाई के साथ जरूरतमंदों का भी सहारा
मंच की ओर से तीन परिषदीय विद्यालयों को प्रोजेक्टर दिए गए हैं। प्रत्येक माह एक गांव के विद्यालय में कार्यशाला कर बच्चों को गणित और विज्ञान की जानकारी दी जाती है। दयावती मोदी स्कूल में टेबल टेनिस प्रतियोगिता तथा श्री हरि इंटर कालेज में निबंध और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जाती हैं।
ज्ञान मंदिर पुस्तकालय में फिल्टर युक्त प्याऊ की स्थापना, गरीबों को निशुल्क वस्त्र और जरूरतमंद परिवारों को भोजन सामग्री उपलब्ध कराने जैसे कार्य भी किए जाते हैं।
वहीं, केंद्रीय विद्यालय की शिक्षिका रहीं उनकी पत्नी दया पांडे भी बच्चों को पढ़ाने में उनका साथ देती थीं। करीब छह वर्ष पहले उनके निधन के बाद भी अचलराज पांडे ने यह मुहिम नहीं रोकी। अब शिक्षिका पूनम गुप्ता निशुल्क कक्षा संचालन में उनका सहयोग करती हैं।
