विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

115 साल पुराने ऐतिहासिक भाखड़ा बांध में आईं दरारें, रामपुर की 40000 आबादी पर मंडराया खतरा

Published: Sun, 13 Sep 2026 10:33 PM (IST)Updated: Sun, 13 Sep 2026 11:00 PM (IST)

रामपुर में 115 साल पुराने भाखड़ा बांध की मिट्टी धंसने के बाद अब उसकी बाउंड्री वॉल में दरारें आ गई हैं, जिससे ढांचा भी धंस गया है।

115 साल पुराने ऐतिहासिक भाखड़ा बांध के ढांचे में आईं दरारें।

115 साल पुराने ऐतिहासिक भाखड़ा बांध के ढांचे में आईं दरारें।

HighLights

  1. 115 साल पुराने भाखड़ा बांध की बाउंड्री वॉल में दरारें।

  2. ढांचा धंसने से बिलासपुर की 40 हजार आबादी को खतरा।

  3. सिंचाई विभाग मरम्मत और नए बांध का प्रस्ताव तैयार कर रहा।

संवाद सहयोगी, बिलासपुर (रामपुर)। 115 वर्ष पूर्व अंग्रेजों द्वारा बनवाया गया ऐतिहासिक भाखड़ा बांध की मिट्टी धंसने के बाद अब सराउंडिंग बाउंड्री वाल के दायीं ओर दरारें पड़ने से स्ट्रैक्चर भी धंस गया है। ढांचे में दरारें आने से क्षेत्र में खलबली मची हुई है और स्थानीय लोगों में किसी बड़े हादसे को लेकर गंभीर आशंका बनी हुई है। हालांकि, सिंचाई विभाग का दावा है कि खतरे वाली कोई बात नहीं है। मरम्मत कार्य के साथ ही नया बांध बनवाने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है।

आठ सितंबर की दोपहर भाखड़ा नदी का बांध अचानक धंस गया था। सड़क में धंसाव होने के बाद डीएम अजय कुमार द्विवेदी समेत अन्य अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर जल्द बांध पर मिट्टी और पत्थरों से पटान करने का आदेश दिया था।

मिट्टी और पत्थर डालने के बाद बांध में हुई खाई को पाट दिया गया था। डैम के अंदरूनी रिसाव को बंद करना विभाग के लिए चुनौती बन गया। इस रिसाव को रोकने के लिए डैम के जलाशय को तेजी से खाली किया जाने लगा। ताकि पानी का स्तर कम होने के बाद ही अंदरूनी रिसाव की तकनीकी मरम्मत कार्य शुरू करवाया जा सके।

बांध ने अपने साथ-साथ उसी साइड के स्ट्रैक्चर को भी अपनी चपेट में ले लिया है। बांध में गहरा और बड़ा धंसाव होने के कारण उसी साइड का स्ट्रैक्चर भी धंस गया है। जिसकी वजह से स्ट्रैक्चर में बड़ी-बड़ी दरारें साफ नजर आ रही हैं। इन दरारों की मरम्मत कराकर उसे सही करना संभव प्रतीत नहीं हो रहा है। इसके चलते सिंचाई विभाग के अभियंताओं की नींद उड़ी हुई है।

बांध के फटने से उसका पानी सीधे बिलासपुर को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे बड़े नुकसान हो सकता है। हालांकि, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन कुमार सिंह बांध फटने जैसी आशंका को सिरे से खारिज कर रहे हैं।

उनका कहना है कि पहाड़ों से पानी के तेज बहाव के चलते बांध क्षतिग्रस्त हुआ है। फिलहाल उसे खाली कराकर जिओ ट्यूब के जरिये पानी का प्रवाह सही करा दिया गया है। चूंकि बांध काफी पुराना है इसलिए इसकी मरम्मत के साथ ही नया बांध बनवाने का प्रस्ताव भी तैयार करा रहे हैं।

अंग्रेजों के जमाने में बने भाखड़ा बांध के अस्तित्व पर संकट से क्षेत्र के लोग भी मायूस हैं। इससे उठने वाली पानी की लहरें आस्था और समृद्धि के वेग को आगे बढ़ाती थीं। इसका निर्माण आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत के लेफ्टिनेंट गवर्नर हारकोर्ट बटलर ने वर्ष 1926 में कराया था। उनके नाम का लिखा पत्थर भी यहां लगा है। बड़ी-बड़ी दरारें आने के चलते अब इसकी जगह दूसरा बांध बनाने की रणनीति तैयार हो रही है।

सड़क धंसने के बाद से ही भाखड़ा बांध के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा था। हालांकि, इसका पानी खाली कराकर जब मरम्मत कार्य शुरू कराया गया तो इसके बचने की उम्मीद जग गई थी। मगर अब उसकी दीवारों में आई दरारों ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

ऐतिहासिक भाखड़ा डैम की, जो सिर्फ कंक्रीट और पानी का एक ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के हजारों किसानों की जीवनरेखा भी है। बात दशकों पुरानी है, जब ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेजों ने बिलासपुर और आसपास की उपजाऊ भूमि की प्यास बुझाने के लिए इस नदी पर एक मजबूत बांध का निर्माण करवाया।

उस दौर के इंजीनियरों ने इस डैम को कुछ इस तरह डिजाइन किया कि इससे निकलने वाली लगभग दो बड़ी नहरें अलग-अलग दिशाओं में फैल गईं। तकनीक आगे बढ़ने के बावजूद भी अंग्रेजों के जमाने का यह डैम पूरी मजबूती से सीना ताने खड़ा रहा। हर साल लगभग 15 हजार हेक्टेयर फसलों को जीवनदान दे रहा है। खेतों में लहलहाती फसलें इस ऐतिहासिक धरोहर की उपयोगिता की गवाही देती हैं। लेकिन इस डैम की कहानी सिर्फ खेतों की हरियाली तक सीमित नहीं है।

क्षेत्रवासियों के लिए इसका एक और रूप भी है, यह गहरी आस्था का केंद्र भी है। हर साल जब कार्तिक का महीना आता है, तो शांत दिखने वाला यह बांध जीवंत हो उठता है। यहां छठ पूजा का भव्य आयोजन होता है। घाटों को सुंदर रोशनी से सजाया जाता है और क्षेत्र के अलग अलग हिस्सों से आने वाले हजारों श्रद्धालु डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

पानी की कलकल ध्वनि के बीच गूंजते छठ के पारंपरिक गीत इस माहौल को अलौकिक बना देते हैं। बदलते दौर में भी इस लाइफलाइन का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। वर्तमान में भी सिंचाई और नहर विभाग की टीमें पहाड़ों से आने वाले पानी और डैम के जलस्तर पर लगातार चौबीसों घंटे पैनी नजर रखती हैं, ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में भी किसानों की फसलों को नुकसान न हो और सिंचाई का यह सिलसिला बिना रुके चलता रहे।

यह भी पढ़ें- संभल में गणेश शोभायात्रा के लिए लागू हुआ रूट डायवर्जन प्लान, कई जगहों पर की गई पार्किंग की व्यवस्था

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।