लालजी शुक्ल, रायबरेली : 16 वर्ष पूर्व पिता बीमार हुए तो ब्लड की जरूरत पड़ी। लोगों की बड़ी मिन्नतें की, जिसके बाद खून मिल सका। इससे मिले सबक ने शिक्षक को रक्तदान का संकल्प दिलाया। अब तक 15 वर्षों में 26 बार रक्तदान और तीन बार प्लाज्मा देकर दूसरों की जिदगी बचा चुके हैं। इनका संकल्प क्षेत्र के लोगों को भी प्रेरित करता है।

कस्बे के गायत्री नगर निवासी अतीश कुमार गोपालपुर उधवन प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं। 2005 में इनके पिता बीमार हुए और खून की आवश्यकता पड़ी। काफी दौड़भाग करने के बाद किसी तरह इंतजाम हो सका। उसी दिन शिक्षक ने रक्तदान करने का मन में संकल्प लिया। मार्च 2006 में शिक्षक ने पहली बार रक्तदान किया। इसके बाद से वे हर छह माह में एक बार रक्तदान जरूर करते हैं। किसी के बुलावे पर रक्तदान करने पहुंच जाते हैं। 41 वर्ष की उम्र में 26 बार रक्तदान कर चुके हैं। प्लाज्मा देने में भी गुरेज नहीं

वर्ष 2018 में डायट में तैनात एक शिक्षिका के पति दुर्घटना में घायल हुए थे। हालत ज्यादा गंभीर थी और उन्हें प्लाज्मा की जरूरत थी। जैसे ही इसकी सूचना अतीश कुमार को मिली, बिना देर किए लखनऊ पहुंचकर प्लाज्मा दिया। डेंगू से पीड़ित मित्र की मां को प्लाज्मा देने लखनऊ पहुंच गए। यही नहीं जिलेभर में होने वाले रक्तदान शिविरों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। वे दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि रक्तदान करके दूसरों को जिदगी देने से बड़ा परोपकार कुछ भी नहीं है। वाट्सएप पर बनाया 'महा रक्तदान' ग्रुप शिक्षक ने वाट्सएप पर भी महारक्तदान नाम से एक ग्रुप बना रखा है। इनमें करीब 30 शिक्षक साथियों को जोड़कर रखा है। किसी को ब्लड की जरूरत होने पर इसे ग्रुप पर शेयर किया जाता है। ब्लड ग्रुप के अनुसार अन्य शिक्षक साथी भी जरूरत पर ब्लड देने पहुंच जाते हैं।

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