रायबरेली : लॉकडाउन में दूरदराज से लौटे प्रवासियों के लिए रोजगार का इंतजाम करने में शासन लगातार जुटा हुआ है। इसी क्रम में पहले से बनी उस योजना में थोड़ा फेरबदल किया गया है, जिसके तहत गांवों में सामुदायिक शौचालय बनवाए गए थे। ताकि प्रवासियों को गांव में ही रोजगार मिल सकेगा।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत घर-घर शौचालय बनवाए गए हैं। इसके बाद भी स्वच्छता में कोई कसर न रह जाए, इसलिए गांवों में सामुदायिक शौचालय बनवाए जा रहे हैं। हालांकि, पहले पहले कुछ चुनिदा गांवों में प्राथमिकता के आधार पर इनका निर्माण होना था। जबकि, अब सभी 989 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनेंगे। इसके अलावा सामुदायिक शौचालयों में सीटों की संख्या भी बढ़ा दी गई है। पहले जहां दो सीटों के शौचालय बनने थे, वहीं अब चार से छह सीट तक के शौचालय बनेंगे। इसके पीछे उद्देश्य सिर्फ एक है कि गांवों में प्रवासियों को रोजगार मिल सके। यह प्रदेश सरकार के उसी गरीब कल्याण रोजगार अभियान का हिस्सा है, जिसे लॉकडाउन के बाद बेरोजगारी को दूर करने के लिए चलाया गया है। इनसेट करीब नौ हजार प्रवासियों के काम का हुआ इंतजाम

अफसरों का कहना है कि एक सामुदायिक शौचालय में कम से कम नौ लोगों को रोजगार मिलेगा। इसे 29 दिनों के अंदर बनाकर तैयार करना होगा। जिले में कुल 989 ग्राम पंचायतें हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो 8901 श्रमिकों के लिए करीब एक महीने के रोजगार का इंतजाम उनके गांव में ही हो गया है। 570 के आए प्रस्ताव, 26 बनकर हुए तैयार

जिला पंचायत राज अधिकारी उपेंद्र राज सिंह ने बताया कि अभी तक 570 ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव आए हैं। जिनमें से 26 बनकर तैयार हो चुके हैं। वहीं 285 में काम चल रहा है। चार सीट वाले सामुदायिक शौचालय में चार लाख और छह सीट वाले सामुदायिक शौचालय में सात लाख की लागत आएगी। इसमें मजदूरी का पैसा मनरेगा से दिया जाएगा। जबकि अन्य बजट राज्य और 14वें वित्त से खर्च होगा।

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