रायबरेली : राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाईपर) में न्यूरोडिजेनेरेटिव रोगों के लिए नैनो आधारित चिकित्सा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। इसमें पहले दिन विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने औषधि खोज और प्रयोग पर अपने विचार रखे। वहीं, न्यूरोडिजेनेरेटिव रोगों के बढ़ते प्रभाव पर सभी ने ¨चता जताई। कहा कि औषधि खोज करने से लेकर मरीजों तक उसे पहुंचाना चुनौतीपूर्ण लक्ष्य है।

संगोष्ठी का प्रारंभ दीप प्रज्जवलन से हुआ। अतिथियों का नाईपर निदेशक डॉ. एसजेएस फ्लोरा ने स्वागत किया। मुख्य अतिथि भूतपूर्व निदेशक जनरल डीआरडीओ डॉ. मानस कुमार मंडल ने कहा कि फार्मा उद्योग को अच्छा रवैया अपनाते हुए सही सोच के साथ सही दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है। औषधि की खोज से मरीजों तक उसका क्रियान्वन एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रहा है। इसके लिए आज एक सम्मिलित प्रयास की जरूरत है, ताकि डिमेंसिया जैसे निदानहीन रोगों के लिए दवाओं की अविलंब खोज किया जा सके।

सीएसआइआर सीडीआरआइ लखनऊ के निदेशक प्रो. आलोक धवन ने नैनोमैटेरियल के बारे में बताया। कहा कि रोगों के उपचार के लिए प्रयोग हो रहे हैं। एनबीआरसी मानेसर के प्रो. पंकज सेठ ने ए नावेल मॉडल फॉर वायरस पर प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में डॉ. सुनील कुमार दुबे, डॉ. राकेश शुक्ल व डॉ. एसके पूरी, डॉ. शैलजा भट्टाचार्य आदि ने शोध के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस अवसर पर प्रो. रजत संधीर, डॉ. बृजेश श्रीवास्तव, प्रो. आरके गोएल, अमर मिश्रा मौजूद रहे। पोस्टर प्रेजेंटेशन से दी बीमारियों की जानकारी

तृतीय सत्र में डॉ. निहार रंजन व डॉ. संजीव ¨सह की अगुवाई में पोस्टर प्रेजेंटेशन हुआ। नाईपर रायबरेली के अलावा सागर यूनिवर्सिटी, मध्यप्रदेश, एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा, वनस्थली यूनिवर्सिटी राजस्थान आदि के छात्रों ने अपना पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। इस दौरान छात्रों ने अपना अनुभव साझा किया। इस दौरान विभिन्न फार्मा कंपनियों के स्टॉल भी लगे रहे। इसमें चिकित्सीय उपकरणों के बारे में जानकारी दी गई।

By Jagran